उरई। राजनीति की लगभग अंतिम पारी खेल रहे सपा के वयोवृद्ध जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह यादव जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव परिणाम को लेकर बेहद दुखी हैं। उन्हें धैर्य बनाये रखना मुश्किल हो रहा है। फिर भी अपने दृढ़ इच्छा शक्ति के बलबूते वह नये उत्साह के साथ उन कार्यकर्ताओं के बीच आज से पहुंचेने का सिलसिला शुरू किया है जिनका खुद का उत्साह गायब हो रहा है।
जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह यादव पार्टी के विरुद्ध आये जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव परिणाम से बेहद हतोत्साहित हैं। एक विशेष साक्षात्कार के दौरान उनकी थकावट और निराशा जाहिर भी हुई। बार-बार संभलने के बावजूद कई बार उनकी निराशा चिड़चिड़ेपन में बदलती दिखी। कहने लगे- ‘‘बताइये मैं क्या करूं? इससे ज्यादा मेहनत इस उम्र में और नही हो सकती थी। एक-एक नेता को समझाने की कोशिश की गई। मैने स्वयं बात की और जरूरत पड़ी तो अपने बेटे को भी भेजा। फिर भी हमारी पार्टी के कुछ बड़े और खास नेताओं ने पार्टी प्रत्याशी आसना खातून के साथ धोखा कर दिया। इस दौरान उन्होंने यह स्वीकार भी किया कि उनकी पार्टी पर इस वक्त दोहरा संकट है। एक तरफ सजातियों की नाराजगी है तो दूसरी तरफ मुसलिम वर्ग आक्रामक तेवरों में है।’’
इतने तनाव और उभरी परिस्थितियों के बावजूद इंद्रजीत सिंह नई आशाओं के साथ जिले भर का भ्रमण कर स्थितियों को सामान्य करना चाहते हैं और अपने करीबियों में फिर से नई ऊर्जा का संचार करना चाहते हैं। 3 सितंबर से 7 सितंबर तक उनका यह विशेष जनसंपर्क अभियान संचालित रहेगा। आज इस अभियान की शुरूआत कोंच नगर से आरंभ हुई। 4 को वह चैरसी, रगेदा, राहिया, सरसौखी, जलालपुर, जैपुरा। 5 को अटरिया, औंता, ककहरा, जगतपुरा, रूराअडडू, आदि। 6 को बम्हौरा, बम्हौरी, रिछारा, श्याम सिकरी, सरसई, बरसेसी तथा 7 सितंबर को कालपी नगर में इस जनसंपर्क अभियान को परवान चढ़ाया जायेगा। इस भ्रमण यात्रा का मुख्य मकसद कार्यकर्ताओं में छायी उदासी को दूर करने के अलावा बूथ कमेटियों की वास्तिविकता को पहचानना है। जहां-जहां बूथ कमेटियां कागजों पर बनी होगी या उनका सुस्ती भरा कार्य होगा उन्हें बदला जायेगा। जिलाध्यक्ष के अनुसार आगामी विधानसभा चुनाव को मददेनजर रखते हुए बूथ कमेटियों का मजबूत होना बहुत जरूरी है। जिलाध्यक्ष सहित उनके सहयोगी नेताओं की ओर से इस दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि विधानसभा चुनाव में अच्छे परिणामों को लेकर अच्छी टीम बनाना बहुत आवश्यक है। इसलिए अब अनुसांगिक संगठनों में भी ऊपर से थोपे गये किसी भी पदाधिकारी को स्वीकार नही किया जायेगा। वरिष्ठ नेता महेश द्विवेदी के अनुसार जब तक जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह यादव की सहमति नही होगी तब तक ऊपर से थोपे गये किसी भी पदाधिकारी से काम नही लिया जायेगा।






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