03-ramleela-manchanजालौन-उरई। रामलीला महोत्सव के 14वें दिन मेघनाद वध, कुम्भकरण वध तथा अहिरावण वध की लीला का मंचन किया गया। जिसमें अहिरावण वध के समय जवारों का कार्यक्रम विशेष आकर्षण युक्त रहा।
गोविन्देश्वर मन्दिर के पास स्थित रामलीला भवन पर रामलीला के ऐतिहासिक 169वें मंचन में कुम्भकरण, मेघनाद तथा अहिरावण वध की लीला का मंचन किया गया। रावण अपने भाई कुम्भकरण को जगाकर युद्ध के लिए भेजता है। कुम्भकरण के विशाल शरीर को देखकर रामादल में सभी घबरा जाते हैं। तभी प्रभु श्रीराम ने एक ही वाण से कुम्भकरण का वध कर दिया। यह सूचना जैसे ही मेघनाद को मिली तो वह कुलदेवी को प्रसन्न करने के लिए हवन पर बैठ गया। तभी विभीषण ने प्रभू श्रीराम को बताया कि यदि मेघनाद ने यह हवन सफलता पूर्वक पूर्ण कर लिया तो फिर उसे हराना असम्भव होगा। यह सुनकर लक्ष्मण वानर सेना के साथ जाकर मेघनाद का हवनकुंड नष्ट कर उसे लड़ने के लिए मजबूर कर देते हैं। जहां लक्ष्मण उसका वध कर देते हैं। मेघनाद के वध की सूचना पाकर रावण बुरी तरह बिलखता है। अबकी बार वह पाताल लोक से अपने पुत्र अहिरावण को बुलाकर उससे रामादल के साथ युद्ध करने के लिए कहता है। अहिरावण रामादल में जाकर राम-लक्ष्मण को चुराकर पाताल लोक ले जाता है। तब हनुमानजी ने पाताललोक जाकर अहिरावण का वध किया और प्रभु श्रीराम व लक्ष्मण को मुक्त कराया। इसी बीच जवारों का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। जो विशेष रूप से आकर्षणयुक्त रहा। रामलीला मंचन के दौरान राम की सुंदर भूमिका में रामकेश पाठक खकसीस, लक्ष्मण केके शुक्ला, हनुमान डॉ. राधेश्याम, मेघनाद प्रयाग गुरू, विभीषण की सुरेंद्र पाराशर सिकरी राजा, अहिरावण रमेश दुबे तथा रावण की भूमिका श्यामशरण कुशवाहा ने निभाई। इसी बीच समय-समय पर हास्य कलाकार सुभाष मस्ताना व महिला नृत्यकार गुंजारानी, लखनऊ ने उपस्थित दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।

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