0 सेवानिवृत्ति पर तीन लेखपालों को तहसील में दी गई भावभीनी विदाई
konch1कोंच-उरई। अपनी सेवा अवधि पूर्ण कर चुके तीन लेखपालों की सेवा निवृत्ति पर आज लेखपाल संघ की तहसील इकाई ने उन्हें समारोह आयोजित कर भावसिक्त विदाई दी। इस मौके पर एसडीएम मुईनुल इस्लाम ने बतौर मुख्य अतिथि कहा कि यह बहुत बड़ी उपलब्धि है कि तीनों लेखपाल अपनी सेवा अवधि सकुशल पूरी करके बेदाग यहां से जा रहे हैं, क्योंकि आज की विषम परिस्थितियों में सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों के सामने कई बार बड़ी चुनौतियां इम्तिहान के तौर पर सामने होती हैं और उन चुनौतियों या बाधाओं को पार लेना बाकई किसी उपलब्धि से कम नहीं है। उन्होंने रिटायर्ड लेखपालों के उज्वल भविष्य की कामना करते हुये कहा कि अब उनके लिये सीमाओं की बाध्यता नहीं है और उनके लिये समाजसेवा का विस्तृत क्षेत्र उनकी प्रतीक्षा कर रहा है। उन्होंने लेखपालों को इंगित करते हुये कहा कि अपने कामों से जनता के दिलों में जगह बनायें।
तहसील सभागार में आयोजित इस विदाई समारोह के विशिष्ट अतिथि तहसीलदार भूपाल सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि जब इन लेखपालों ने नौकरी शुरू की होगी तब से आज की स्थितियों परिस्थितियों की तुलना करें तो बड़े बदलाव साफ दिखाई देते हैं, चुनौतियां पहले की अपेक्षा कई गुना बड़ी हैं लेकिन विपरीत परिस्थितियों में भी जो अपनी क्षमता और चतुराई से काम करते हैं वे कभी भी पायदान पर असफल नहीं होते हैं। उन्होंने कुछ पुराने अनुभवों को साझा करते हुये कहा कि पहले गांव के लोगों के लिये पटवारी ही सबसे बड़ा अधिकारी होता था और लेखपाल या पटवारी भी जनता के भरोसे को बनाये रखने के लिये प्राणपण से कार्य करता था। आज स्थितियां भले ही बदल गई हों लेकिन यदि मनोयोग से कार्य किया जायेगा तो जनता का भरासा अभी भी कायम रह सकता है। उन्होंने अधीनस्थों को ताकीद की कि इनके जो भी देय हों तुरंत अदा किये जायें। संचालन रामविहारी राठौर ने किया। इससे पूर्व सेवा निवृत्ति ले रहे लेखपालों रामसिंह, बाबूलाल व जमनाप्रसाद को लेखपाल संघ के पदाधिकारियों प्रेमनारायण मिश्रा, तकदीर सिंह, कृष्णपाल सिंह, बलवानसिंह, राजेन्द्र वर्मा, अमरसिंह, देवेन्द्रसिंह, मुलूप्रसाद, रामकुमार निरंजन, चंद्रप्रकाश, बलराम, नरेन्द्रसिंह, ब्रजेशकुमार, सुरेन्द्रसिंह, प्रेमकिशोर, अशोककुमार, दिलीपकुमार, कमलेश, शिवम गुर्जर, राजेश मिश्रा, रमेशचंद्र, ब्रजराजसिंह, प्रदीपकुमार, काशीप्रसाद आदि ने मालायें पहना कर तथा अंगवस्त्र, धार्मिक पुस्तकें व श्रीफल से सम्मानित करते हुये उनके यशस्वी जीवन की कामना की।

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