उरई। शुक्रवार की आज की परेड में पुलिस अधीक्षक डाॅ. राकेश सिंह ने मुंशी, थाने के सेकेंड अफसरों और महिला कांस्टेबिलों के कौशल का इम्तिहान लिया। ट्रेनिंग के दौरान सिखाये गये सबक को वास्तविक चुनौती के समय वे कितना अमल में ला पाते हैं इस परीक्षा में कई लोग एसपी की कसौटी पर खरे साबित नही हुए जिसकी वजह से एसपी को उन्हें नसीहत में कड़वे बोल की दवा पिलानी पड़ी।
पुलिस अधीक्षक डाॅ. राकेश सिंह ने कार्यभार संभालने के बाद शुक्रवार की परेड को सार्थक रूप देने की कोशिश की है। इसके तहत एक शुक्रवार को सारे थानाध्यक्ष और किसी शुक्रवार को दूसरे अधीनस्थ बुलाकर उनसे हथियार चलाने, दंगा निरोधक ड्रिल और अन्य आपात परिस्थितियों में लिए जाने वाले एक्शन के बावत उनकी सजगता को परखा। रिफ्रेशर पर ध्यान न दिये जाने की वजह से ट्रेनिंग में पुलिस जो सीखती है मौका आने पर उसे भूल जाना बड़ी चूक का कारण बन जाता है। पुलिस की कार्य कुशलता में गिरावट की इस तरह पोल खुलने से हाल में विभाग पर कई प्रश्नचिंह लगे।
पुलिस अधीक्षक ने इस तरह की शर्मिंदगी से मातहतों को उबारने की कमर कसी है। शुक्रवार की परेड में पूरी संजीदगी बरत कर वे इस मकसद को पूरा कर रहे हैं। आज पुलिस के जिस कैडर की बारी थी सुबह उनसे अत्याधुनिक हथियार चलवाये गये। दंगा निरोधक रिहर्सल कराया गया। सार्वजनिक स्थानों पर भगदड़ जैसी स्थितियों से निपटने और आतंकवादी हमले का तत्पर जबाव देने के बिंदु पर भी उनका इम्तिहान लिया गया। कई मातहत चूंक करने की वजह से कप्तान साहब की डांट का निशाना बने। इसके बावजूद पुलिस जनों को परेड के इस अंदाज में बहुत मजा आया जिससे उन्हें अपनी ट्रेनिंग के टिप्स ताजा करने का मौका मिला।







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