0 एक अध्यापक का दो दो जगह कराया जाता अनुमोदन
cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngकोंच-उरई। शिक्षा विभाग और सरकार के लाखो प्रयास के बाबजूद भी निजी शिक्षण संस्थान अपनी लापरवाही एवं फर्जीवाड़ा करने से बाज नहीं आ रहे है। ऐसा ही एक मामला एम.एस.डी. महाविद्यालय तीतरा में चल रहे इस संस्था में विद्यालय के साथ साथ बी.टी.सी. काॅलेज चलाया जाता है। जहाॅ कई प्राध्यापक ऐसे है जिसके अनुमोदन दो दो जगह है। महाविद्यालय के रसायन विभाग में तैनात प्रवक्ता हरदत्त निरंजन महाविद्यालय के अलावा बी.टी.सी. काॅलेज में साइन्स विभाग में भी अनुमोदित है। ऐसे ही इसी महाविद्यालय के इतिहास विषय में अनुमोदित हरीमोहन निरंजन का भी बी.टी.सी. में मनोविज्ञान के प्रवक्ता के रुप में अनुमोदित है एक व्यक्ति दो दो जगह अनुोदित कराकर काॅलेज प्रशासन फर्जीवाड़ा कर रहा है। जबकि विभाग में गणित विषय का कोई प्रवक्ता अनुमोदित नहीं है। प्रशासन द्वारा जिसे प्राचार्य दर्शाया गया वही भी कभी बी.टी.सी. काॅलेज नहीं आते है एवं इनका वेतन भुगतान जमा निकासी जमा निकासी के तौर पर दर्शाया जाता है सूत्रो से पता चला है कि बी.टी.सी. विभाग में साइंस अध्यापक हरदत्त निरंजन ने तो कभी कार्यभार ग्रहण ही नहीं किया और काॅलेज बच्चों के प्रवेश लेकर उनके भविष्य को चैपट करने में लगा है यहाॅ कार्यवाहक प्राचार्य मनोज निरंजन भी केवल भाषा अध्यापक के रुप में अनुमोदित है फिर भी काॅलेज प्रशासन द्वारा उन्हें कार्यवाहक प्राचार्य बनाया है काॅलेज प्रशासन द्वारा महाविद्यालय में ही इण्टर काॅलेज चलाने का काम किया जा रहा है। जिसे बुन्देल विश्वविद्यालय प्रशासन आॅखे बंद करके देख रहा है। जबकि महाविद्यालय में तैनात प्राध्यापक/कर्मचारियों को वेतन तक नहीं दिया जाता एव ंबी.टी.सी. विभाग में छात्रो की आने के लिये बोली लगाकर रकत तय की जाती है। और पैसा संस्था में जमा करने पर उसकी उपस्थिति की गारण्टी ले ली जाती है। इस प्रकार की निजी संस्था अध्यापको के दो उपस्थिति रजिस्ट्रर बनाये जाते है एक रजिस्टर पर अनुमोदित प्राध्यापको के हस्ताक्षर कराये जाते है जो कभी कभी ही महाविद्यालय आते है। और दूसरे रजिस्टर के उन अध्यापको के हस्ताक्षर कराये जाते है। जो अस्थायी रुप से तैनात है। और उन्हीं से कक्षाये पढ़वायी जाती है। अब विश्वविद्यालय को अनुमोदित अध्यपको का रजिस्टर दिखाया जाता है। देखना होगा कि एन.सी.टी.ई. प्रशासन एवं बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय प्रशासन इस फर्जीवाड़े वाले बी.टी.सी. काॅलेज एवं महाविद्यालय पर क्या कार्यवाही करता है जिससे आने वाले समय में छात्रो के भविष्य को नष्ट होने से बचाया जाये।

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