उरई। 500 के ढाई सौ और हजार के 50 पेट्रोल पंप मालिकों को नोट बंदी के बाद भारत सरकार द्वारा मुद्रा के काले व्यापार से अंधाधुंध मुनाफे का जो द्वार खुलता नजर आ रहा है। यह रेट उसकी एक बानगी है।
पेट्रोल पंप कारोबारियों को आंधी के आम की तरह मौरंग माफियागीरी व इसी तरह के अन्य धंधों से हाल के वर्षों में करोड़ों, अरबों रुपये बटोरने का जो शुभ अवसर मिला था। उस काले धन को कितना भी एडजस्ट कर देने के बावजूद नोट बंदी के बाद हजार और पांच सौ की शक्ल में नगदी का भंडार बचा रह गया है जिसे वे सत्यनारायण कथा के सेठ की तर्ज पर रददी का टुकड़ा बनाकर बर्बाद करना गंवारा नही कर सकते। इसलिए उनका आॅफर पेट्रोल पंप मालिकों के पास गया। पेट्रोल पंप मालिकों ने भी गरज देखकर कमीशन सीधा पचास प्रतिशत कर दिया है।
काला बाजारियों और पेट्रोल पंप मालिकों के बीच हुए इस सौदे का असर यह है कि रविवार को 50 रुपये तक की रकम आते ही कर्मचारियों को सीधे मुनीम के पास जमा कराने के निर्देश होने की वजह से साफ कहा जा रहा था कि पांच सौ या हजार का नोट देने पर फुटकर पैसे किसी कीमत पर वापस नही लौटाये जायेंगे। फुटकर रुपये मिलने के बावजूद हो रहे इस इंकार से ग्राहक बार-बार भड़क रहे थे और उनके व पेट्रोल पंप कर्मचारियों के बीच झगड़ा हो रहा था। पेट्रोल पंप कर्मचारी उनसे नौकरी के नाते अपने ऊपर रहम करने की गुहार करके किसी तरह झगड़े को टालते रहे।






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