0 डाकघर कर्मी अपनों का काला का सफेद करने के चक्कर में गरीबों को दुत्कार रहे
0 बैंकों में कैश की समस्या ने आम आदमी को रुलाया
konch1कोंच-उरई। मोदी सरकार द्वारा हजार पांच सौ के नोटों पर बैन का असर धीरे धीरे आम जिंदगी को अपनी गिरफ्त में लेता दिख रहा है। ब्ेंकों और डाकघरों में भीड़ घटने के बजाये और भी बढ़ती जा रही है जिसका मुख्य कारण अब धन्ना सेठों द्वारा अपनी काली कमाई को सफेद करने के चक्कर में गरीब तबके के लोगों को लाइन में लगाने के लिये हायर किया जाना माना जा रहा है। कमोवेश यही नजारा दिखा लगभग सभी बैंकों में जहां लोगों की लंबी लंबी कतारें जरूरतमंदों और बैंक कर्मियों की मुश्किलें बढाने का काम कर रही हैं। बजरिया उपडाकघर में आज एक बूढा गरीब तिदई पुत्र भोंदू निवासी मालवीय नगर कोंच सुबह से बैठा था, उसे अपने खाते से दो हजार रुपये निकालने थे लेकिन शाम को उससे कैश नहीं होने का बहाना कर टरका दिया गया। इसकी शिकायत जब एसडीएम मुईनुल इस्लाम से की गई तब कहीं जाकर उस गरीब को दो हजार रुपये नसीब हो सके।
बैंकों में अब कैश की समस्या मुंह बा रही है। लाखों के भुगतान के बाद भी बैंक शाखाओं के बाहर हजारों की भीड़ खड़ी अपनी बारी का इंतजार करती देखी जा रही है लेकिन बाद में उनसे कैश आने पर मिलने की बात कह कर चलता कर दिया जाता है। पीएनबी और एक्सिस बैंक शाखाओं में हालांकि नई करेंसी आई लेकिन एक्सचेंज और निकासी का दबाव इतना ज्यादा है कि आया कैश ऊंट के मुंह में जीरा बन कर रह जाता है। स्टेट बैंक में भी बैंक शाखा के अंदर तथा बाहर हजारों की भीड़ लगी है, इस शाखा में हालांकि लोगों को भुगतान दिये जा रहे हैं लेकिन करंट अकाउंट वालों की शिकायत है कि प्रधानमंत्री ने पचास हजार तक के कैश भुगतान की घोषणा की है लेकिन बैंक अधिकारी यह कह कर कि उनके पास लिखित आदेश नहीं आया है, चालू खाताधारकों को चलता कर दे रहे हैं। गल्ल व्यापारी अखिलेश बबेले अपनी पचास हजार की चेक बापिस ले कर आ गये। सहकारी कोऑपरेटिव बैंकों में जमा करने के लिये मनाही के आदेश आ जाने के बाद उनके खाताधारक अपनी रकम जमा कराने के लिये भटक रहे हैं। यहां गौरतलब यह है कि साढे चार हजार के एक्सचेंज और एक बार में चैबीस हजार की खातों से निकासी की घोषणा भी बेअसर दिख रही है, बड़े बैंक अभी भी चार हजार और छोटे बैंक हजार दो हजार के भुगतान करके काम चला रहे हैं। डाकघरों की लीला भी निराली है, कर्मचारी अपने खासुलखासों के भुगतान करने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं, यहां तक कि डाकघर के दरबाजे अंदर से बंद कर अंदर ही अंदर खेल कर रहे हैं और आम खाताधारकों की समस्याओं की अनदेखी कर मोदी की भ्रष्ट्राचार और कालाधन के खिलाफ जारी मुहिम को चकनाचूर करने में लगे हैं।

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