15orai01उरई। यह बैठक निरीह किसानों और मजदूरों की नही थी जिसमें अधिकारी शहजोर होकर बात करते हैं। यह बैठक पेट्रोल पंप मालिकों की थी जिनकों फेस करते हुए अधिकारियों को समझ में आया कि वास्तव में जब ऊट पहाड़ के नीचे होता है तो कितना बौना हो जाता है।
पेट्रोल पंप मालिकों ने इस बैठक में अधिकारियों के मुंह पर साफ कहा कि वे पांच सौ और हजार के नोट लेकर आने वाले ग्राहक को पैसे काटकर छुटटा नही दे पायेगें। उन्होंने कहा कि सरकार के फैसले ने उनकी खुद की हालत खराब कर दी है। जिससे पेट्रोल पंप चलाने में उन्हें लोहे के चने चबाने पड़ रहे हैं। इसके बावजूद उन पर दबाव बनाया जाये तो वे इस अन्याय को नही झेलेंगे।
पेट्रोल पंप मालिकों की इस घुड़की के आगे अधिकारियों को सांप सूंघ गया और चाय, नाश्ते से उनका गुस्सा शांत करने की कोशिश करके अधिकारियों ने बैठक खत्म कर दी।
यही नही पेट्रोल पंप मालिकों ने अधिकारियों को ग्राहकों के खिलाफ कार्रवाई की नसीहत भी दे डाली। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि उनकों बैंकों से 10-10 रुपये के सिक्के मिले हैं जिन्हें देने पर ग्राहक लड़ने पर आमादा हो जाते हैं। प्रशासन इसके बावजूद ग्राहकों की इस उदंडता पर लगाम लगाने की नही सोच पाया है। उन्होंने अधिकारियों को हिदायत दी कि ऐसे ग्राहकों के खिलाफ मुकदमें दर्ज किये जायें तांकि उनकी हिमाकत खत्म हो सके।
बैठक की अध्यक्षता जिला पूर्ति अधिकारी अशोक कुमार ने की। संचालन पूर्ति निरीक्षक मनोज तिवारी द्वारा किया गया। बैठक में डाॅ. दिलीप सेठ, अवधेश, विशाल, राजीव गिरहोत्रा, पंकज गिरहोत्रा, टीटू बंसल आदि मौजूद थे। पहले इस बैठक में प्रशासन के सीनियर अधिकारियों के उपस्थित रहने का इंतजाम किया गया था लेकिन भड़के पेट्रोल पंप मालिकों के तेवर पता लग जाने की वजह से प्रशासनिक अधिकारी तहसील दिवस के बहाने किनारा कर गये।

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