15orai05उरई। मर्ज बढ़ता ही गया ज्यों-ज्यों दवा की। नोट बंदी के बाद पैदा हुए अफरा-तफरी के माहौल में अभी तक कोई सुधार होना तो दूर हालत दिन पर दिन और बदतर हो जाने की है। एडवेंचरस प्रधानमंत्री के इस एक्सपेरिमेंट की वजह से भ्रष्टाचार और दलाली का नया दरवाजा खुल गया है जिसकी झलक बैंकों में देखने को मिली। आम लोग पैसे जमा कराने के लिए लाइन में लगे थे तो भीतर बैंक के मैनेजर और बाबुओं के कक्ष में सस्पेंस का माहौल था। झांकने पर पता चलता था कि उनके पास बैठे सफेद पोश थोक में आधार कार्ड और वोटर कार्ड की आईडी जमा करके एक मुश्त रकम का आदान-प्रदान कर रहे हैं। यही आलम कालपी के पोस्ट आफिस में देखने को मिला। शायद मुख्यालय के पोस्टआॅफिस और अन्य पोस्ट आॅफिसों में भी खास मेहमानों को इसी तरह की सुविधा प्रदान की जा रही हो।
जिस दिन से नोट बंदी का फैसला लागू हुआ है उस दिन से लोगों की आंखें बैंकों में लगी लाइन में उन लोगों को ढूढ़ने को तरस रही हैं जिनके काले धन को बाहर निकालने के नाम पर यह कहर बरपा किया गया है। उन्हें सरकार के फैसले से कोई परेशानी हो या न हो पर लाइन में आम जरूरत मंद जरूर हलकान देखे जा सकते हैं। लोगों को दैनिक खर्चे के लिए पैसे की व्यवस्था और रुपये बदलने में पूरा दिन खपाकर अपना व्यापार मजदूरी चैपट करने को मजबूर होना पड़ रहा है और पीएम चाहे जितनी तसल्ली दें पर यह संत्रास कब तक चलता रहेगा। यह अंदाजना मुश्किल हो रहा है। उधर कस्बा कोटरा से खबर आई है कि कुछ दलाल बैंक कर्मियों से सांठगांठ कर उनकी मजबूरी का फायदा उठाते हुए पांच सौ रुपये के बदले मात्र साढ़े तीन सौ रुपये दे रहे हैं।

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