जालौन-उरई। 500 व 1000 की नोटबंदी से गल्ला मंडी के व्यापारियों सहित मंडी में कार्य करने वाले मजदूरों को काफी परेशानियांे का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं गल्ला मंडी में आने वाले किसानों को भी मायूस होकर वापस लौटना पड़ रहा है।
500 व 1000 की नोटबंदी के कारण किसानों, व्यापारियों सहित मजदूरों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गल्ल मंडी के व्यापारियों में गल्ल मंडी संघ के अध्यक्ष रविकांत द्विवेदी, महामंत्री प्रेमदास गुप्ता, धर्मेंद्र दीवौलिया, नीरज अग्रवाल, मनोज शिवहरे, रामू गुप्ता, राजू खलील, विष्णु गुप्ता, बब्लू शर्मा, पप्पू अग्रवाल आदि ने बताया कि जबसे केंद्र सरकार द्वारा नोटबंदी लागू की गई है। तभी से गल्ला मंडी का व्यापार ठप पड़ा है। इतना ही नहीं 10 नबंवर से गल्ला मंडी में अनिश्चतकालीन बंदी भी की गई है। क्योंकि व्यापारियों के पास किसानों को देने के लिए रूपए ही नहीं हैं। इतना ही नहीं व्यापारी भी माल को कहीं बाहर नहीं भेज पा रहे हैं। क्योंकि वहां से भी उन्हें पेमेंट नहीं मिल पा रहा है। व्यापार न होने की वजह से व्यापारियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नोटबंदी को लेकर गल्ला मंडी में मजदूरी का कार्य करने वाले संतोष कुमार, नौशाद अली, उमाशंकर, पप्पू, विनोद कुमार आदि बताते हैं कि मंडी में व्यापार न होने की वजह से उन्हें भी कोई काम नहीं मिल पा रहा है। जिसके चलते उन्हें रोजमर्रा के खर्च चलाने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उनके पास रूपए तो इकट्ठे रखे नहीं हैं कि वह उनमें से अपने खर्च चला सकें। उनकी रोज की आमदनी है और रोज के ही खर्चे हैं। नोटबंदी के फैसले के कारण मंडी का व्यापार ठप्प पड़ा है। जिसके चलते उन्हें भी कोई काम नहीं मिल रहा है। उधर, मंडी में अपना माल बेचने आए क्षेत्रीय किसान सत्य नारायण, गजेंद्र सिंह गढ़गवां, जीतू शेखपुरा, राघवराम लौना, रघुवर दयाल करनपुरा, ब्रह्मशंकर हीरापुरा, अरूण कुमार जगनेवा कहते हैं कि वह बड़ी आशा लेकर अपना माल लेकर मंडी में बेचने आए थे। लेकिन जबसे उन्हें पता चला कि नोटबंदी के कारण मंडी में कोई कार्य नहीं हो रहा है, तबसे वह काफी परेशान हैं। किसान राजाराम बताते हैं कि उनकी बेटी की शादी है, वह सोच रहे थे कि वह अपना माल बेचकर जो रूपए मिलेंगे, उससे अपनी बेटी की शादी नपिटा लेंगे। लेकिन मंडी बंद होने के कारण वह ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। अब उन्हें चिंता सता रही है कि वह कैसे अपवनी बेटी के हाथ पीले करेंगे। बहरहाल बड़े नोट बंद किए जाने का असर सभी ओर दिखाई पड़ रहा है। नोटबंदी से चाहे किसान हों, व्यापारी अथवा मजदूर सभी को परेशानियां उठानी पड़ रही हैं और इस समस्या से अभी हाल में उन्हें निजात मिलती भी नहीं दिख रही है। लोगों को बस यही लग रहा है कि जल्द से जल्द उनकी यह समस्या खत्म हो और वह सामान्य रूप से अपने रोजमर्रा के काम निपटा सकें।

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