उरई : भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण लखनऊ मंडल के तत्वावधान में चौरासी गुम्बद परिसर में विश्व धरोहर सप्ताह का उद्घाटन धूमधाम से किया गया।
उद्घाटन समारोह की मुख्य अतिथि कानपुर विश्वविद्यालय की वरिष्ठ प्रवक्ता डा. सचिता शर्मा ने कहा कि हमारे देश की सभ्यता, संस्कृति एवं ऐतिहासिक धरोहरों को संजोए रखने की आवश्यकता है। प्राचीन धरोहरों को उसी प्रकार संरक्षण प्रदान करें जिस प्रकार हम लोग धन-दौलत एवं आभूषणों की करते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण लखनऊ के अधीक्षण पुरातत्वविद नवरत्न पाठक ने कहा कि अगर हम सभी लोग ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण एवं विकास के लिए जागरूक हो जाएं तो उस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा और खुशहाली आएगी। समारोह में अयोध्या प्रसाद गुप्त, राजेंद्र पुरवार, रामप्रकाश, जयश्री पुरवार, बृजेंद्र निगम, सयूम अहमद, नुजहत जहां, एए हाशमी, तारिक अनवर ने संबोधित करते हुए ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की महत्ता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर लखनऊ के बुजुर्ग इतिहासकार डा. एआर सिद्दीकी द्वारा उर्दू में रचित आसारे कदीमा नामक पुस्तक का विमोचन किया गया। उन्होंने बताया कि पुस्तक में मानव की उत्पत्ति से लेकर आज तक की कहानी एवं प्रमुख शहरों का इतिहास तथा महत्वपूर्ण किलों, इमारतों का वर्णन किया गया है। इस मौके पर छायाचित्र प्रदर्शनी का लोकार्पण भी किया गया। यह प्रदर्शनी 25 नवंबर तक चलेगी। इसमें ऐतिहासिक स्मारक विषय छायाचित्र प्रदर्शित किए गए हैं।
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चित्रकला, निबंध में निशा प्रथम
कालपी : भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण लखनऊ मंडल द्वारा चित्रकला, निबंध प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। इसमें आर्यकन्या इंटर कालेज की छात्रा निशा आरफीन ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। निशा के साथ ही लायक खान, प्रज्ञा, शारदा गुप्ता, प्राची गौतम, मुस्कान पुरवार, शिप्रा गुप्ता, नेहा गुप्ता, रिया गुप्ता, सोनम, गौरी द्विवेदी, कोमल, प्रिया, कनीज फातमा को पुरस्कृत किया गया। सयूम अहमद, मनोज वर्मा, पीकेके रेड्डी, श्रवण कुमार, दिवाकर ¨सह, डीवी यादव, एए हाशमी, डा. निधि वर्मा, डा. निकिता चंद्रा, जितेंद्र, दीपक चौधरी सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।





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