27orai01उरई। उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम को अपनी यात्रियों के साथ जेब कटी करते हुए शर्म नही आ रही। प्रदेश के स्मार्ट सीएम अखिलेश यादव को भी इस ओर गौर करने की फुर्सत नही मिल पा रही क्योंकि परिवहन विभाग उनके पिता के द्वारा अवध्य घोषित, पोषित गायत्री प्रसाद प्रजापति के पास है। जिनकी ओर निगाह करना भी उनके लिए पिता श्री और पार्टी सुप्रीमों वर्जित कर चुके हैं।
नोट बंदी के बाद वैकल्पिक मुद्रा के तेज प्रवाह में लाचार साबित हो रही भारत सरकार ने तदर्थ तौर पर जो रियायतें घोषित की हैं उनमें टोल टैक्स की वसूली स्थगित किया जाना भी शामिल है। ईमानदारी की बात तो यह है कि इसके बाद परिवहन विभाग की बसों के यात्रियों से किराये में टोल टैक्स जोड़कर वसूली किया जाना बंद कर दिया जाता लेकिन गली मोहल्ले के छिछोरे चीटरों जैसी हरकत पर उतारू यूपी रोडवेज यात्रियों की आंखों में धूल झोंककर टिकट के साथ टोल टैक्स भी वसूल रही है। जबकि प्रत्येक यात्री निगम का क्लाइंट होने के नाते रोडवेज से बेहतर और साफ-सुथरी सेवा का हकदार है।
इस बारे में स्थानीय डिपो के एआरएम अपराजित श्रीवास्तव से बात की गई तो उनका कहना था कि किराया निर्धारण उनके हाथ में नही है। अब सवाल यह उठता है कि टोल टैक्स के नाम पर हाल फिलहाल हो रही वसूली रोडवेज के खजाने में तो जमा हो नही रही होगी फिर वसूली की यह रकम किसकी गृहस्थी के आटे-दाल के इंतजाम मे जा रही है।
बीपीएल कार्ड धारक से करोड़ पति, अरब पति तक का सफर जन सेवा की राजनीति से तय करने वाले अनूठे, अनोखे मुलायम सिंह के नवरत्न गायत्री प्रसाद प्रजापति जिस विभाग के मंत्री हों वह चर्चा का विषय न बने यह तो किसी भी तरह संभव नही है। परिवहन विभाग नोट बंदी के बाद इस बात के लिए भी चर्चा के केंद्र में आ गया था कि किसी ऊपर वाले के इशारे पर टिकट चेकर आजकल निगम की बसों को रास्तें में खड़ी कर किराये के रूप में यात्रियों द्वारा दिये जाने वाले छोटे नोटों को छीनकर उन्हें रिजेक्ट किये जा चुके बड़े नोट जमा कराने के लिए सौंप रहे हैं। निगम के आकाओं द्वारा कराई जा रही इस गुण्डागर्दी की बुरी कीमत कण्डक्टर चुकाने को मजबूर हैं। वजह यह है कि रास्ते में बैठने वाले यात्री को कण्डक्टर छुटटे पैसे दे नही पाता जबकि यात्री समझता है कि कण्डक्टर बदमाशी कर रहा है। इसलिए कुछ कण्डक्टर पिट भी चुके हैं पर वे अपना रोना किससे रोयें। गरीब परवर की छवि मजबूत करने में मशगूल सीएम अखिलेश अपने पिता के दुलारे के विभाग की इस कारगुजारी से कण्डक्टरों और यात्रियों को राहत दिलाने की सोच सकते हैं या नही जनमानस में यह सवाल भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

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