उरई। उम्मीद और अनुमान के मुताबिक मंगलवार को श्रावणी पूर्णमासी के अगले दिन माहिल तालाब से घंटा घर तक आयोजित होने वाले भुजरियां मेले में इस बार अभूतपूर्व गहमा-गहमी रही। प्रशासन ने इसको देखते हुए पहले से ही इस क्षेत्र में वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया था। मेले में संजी दुकानों पर खरीददारी भी जमकर हुई जिससे दुकानदारों के चेहरे भी खिले नजर आये। कीरत सागर की लड़ाई की वजह से संपूर्ण बुंदेलखंड की तरह उरई में भी भुजरियां मेला श्रावणी पूर्णमासी के एक दिन बाद आयोजित किया जाता है। इस मेले में जहां ग्रामीण क्षेत्र से लोग जिन में खासतौर से महिलाएं होती हैं। खप्परों में उगाई गईं भुजरियां माहिल तालाब में सिराने के लिए उमड़ते हैं। वहीं शहर के सभ्रांत लोग घंटाघर के पास जुटकर एक-दूसरे को भुजरियां देते हुए उम्र के अनुसार अभिवादन करते हैं। इस मिलन कार्यक्रम की गरिमा कुछ अलग ही मानी जाती है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से विभिन्न कारणों की वजह से भुजरियां मेले की रौनक छीजती जा रही थी। घंटा घर पर एकत्रित होने वाले महानभावों की संख्या भी गिने-चुने लोगों तक सिमटने लगी थी। सबसे ज्यादा निराशा कुछ वर्षों से उन अस्थाई दुकानदारों को हो रही थी जो मेले में खाने, खिलौने व विसराती सामान का स्टाॅल लगाते थे। लेकिन देश-प्रदेश के बदले राजनैतिक परिवेश में परम्परागत पर्वों की रंगत भी चटख होती जाने का असर आज भुजरियां मेले में साफ दिखाई दिया। दोपहर से ही भीड़ का जो रेला शुरू हुआ वह देर शाम तक खत्म नही हो पाया। माहिल तालाब से घंटा घर तक सड़क भीड़ से इतनी ठसाठस भरी रही कि पैदल चलकर भी कुछ गज नापने में घंटों का समय लग रहा था। महिलाओं और बच्चों ने मेले की दुकानों में जमकर खरीददारी भी की। सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा ने भी इस उपलक्ष्य में लोगों से मेल-मिलाप का पूरा लुत्फ उठाया। साहित्कार और लोक संस्कृति विशेषज्ञ अयोध्या प्रसाद कुमुद, प्रमुख व्यवसाई मनोज माहेश्वरी, रेडक्रास के सचिव युद्धवीर कंथरिया आदि लोग मेला में प्रमुख रूप से सक्रिय रहे।

One response to “भुजरियां मेला में उमड़ा भीड़ का अभूतपूर्व रैला, पिछले कई वर्षों से छा रहा सन्नाटा मय ब्याज के लोगों के उत्साह ने किया गुल”

  1. अभिषेक सेठ Avatar
    अभिषेक सेठ

    उरई , ऐसे हर्षोल्लास के पर्व मनाता रहे।

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