उरई। नगर पालिका की सदर सीट पर भाजपा में चल रहे मंथन से ब्राह्मण समाज के जख्म हरे हो सकते हैं। ब्राह्मणों में विधान सभा चुनाव के समय ही इस बात को लेकर नाराजगी के सुर फूटे थे कि वे लोग भाजपा की जीत में सबसे बड़ी भूमिका निभा रहे हैं फिर भी जिले की एक भी विधान सभा सीट पर किसी ब्राह्मण प्रत्याशी को मौका नही दिया गया है। भाजपा में अंदरखाने से छन कर आ रही खबरों के अनुसार पार्टी के कर्ता-धर्ताओं ने इससे कोई सबक न लेते हुए एक बार फिर ब्राह्मणों को हाशिए पर रखने के लिए जिला मुख्यालय की नगर पालिका सीट पर अध्यक्ष पद के लिए वैश्य उम्मीदवार उतारने का फैसला कर लिया है।
इस खबर के लीक होने से मंगलवार को जगह-जगह ब्राह्मण समुदाय के लोगों के जत्थों के बीच भाजपा में उनके समाज के साथ दुभाति की चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। जानकार गिना रहे थे कि पार्टी में सदर सीट पर आज तक विधायक के रूप में वैश्य समाज के नेताओं श्याम सुंदर गुप्ता और बाबूराम एमकाॅम को ही अवसर मिला। इसके अलावा जब पार्टी सहकारी बैंक में अपने अध्यक्ष के लिए सक्षम हुई तो उसने बैकवर्ड को प्राथमिकता दी। सांसद और सदर विधायक की सीटें यहां आरक्षित हो चुकी हैं। ऐसे में ब्राह्मण उनके दबदबे के अनुरूप सदर की लोकसभा सीट की चेयरमैनी के लिए अपने को सर्वोपरि हकदार मान रहे थे पर पार्टी ने फिर उन्हें दोयम स्थिति में धकेलने का मंसूबा बना डाला है। सदर नगर पालिका की अध्यक्षी को लेकर ब्राह्मणों की यह बगावती भावनाएं निकाय चुनाव में जिले में नया गुल खिला सकती हैं।







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