उरई। समाजवादी पार्टी में लंबे समय से हाशिए पर चल रहे पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी ने मंगलवार को आजमगढ़ पहुंचकर बसपा की रैली में पार्टी सुप्रीमों मायावती के सामने पाला बदल कर दिया। उन्होंने बसपा में शामिल होने की घोषणा कर दी है। उनके इस अप्रत्याशित कदम से समाजवादी पार्टी में शीर्ष से लेकर जिले तक खलबली मच गई है।
मूल रूप से हमीरपुर जिले के निवासी घनश्याम अनुरागी को समाजवादी पार्टी सुरक्षित क्षेत्र होने के कारण जालौन जिले की राजनीति में 2004 में लोकसभा चुनाव के लिए ले आई थी। पहली बार घनश्याम अनुरागी को विशेष कामयाबी नही मिल पाई लेकिन दूसरे चुनाव में 2009 में उन्होंने यह सीट हथियाने में सफलता हासिल कर ली। जालौन जिले में समाजवादी पार्टी को किसी चुनाव में मिली यह पहली सफलता थी। इसके बाद 2012 में समाजवादी पार्टी ने उरई सदर सीट भी जीतने में कामयाबी हासिल की।
पार्टी के लिए लकी चेहरा बन जाने से प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार आने के बाद घनश्याम अनुरागी का सितारा बुलंदी पर पहुंच गया। जालौन जिले के एकछत्र नेता बनकर उन्होनें पार्टी को गांव-गांव तक खड़ा कर दिया। घनश्याम अनुरागी को नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव का प्रोडक्ट माना जाता है। इस कारण समाजवादी पार्टी में जब पीढ़ियों के बीच सत्ता का हस्तांतरण हुआ तो घनश्याम अनुरागी की उपेक्षा शुरू हो गई और वे पार्टी में अलग-थलग पड़ते गये। इसी कुंठा में उन्होंने नई राह की तलाश शुरू कर दी थी। इस बीच बहुजन समाज पार्टी ने शीर्ष स्तर से उनसे संपर्क की पहल की। कई दिनों से उनके तार बसपा सुप्रीमों से जुड़े थे लेकिन कोई इसकी भनक नही पा सका।
आज उनके दल बदल से जिले में समाजवादी पार्टी को गंभीर झटका लगने का अनुमान है। अब फिलहाल जिले में उनकी टक्कर का समाजवादी पार्टी के लोगों को मजबूत रहनुमाई देने वाला नेता नही रह गया है। नगर निकाय चुनाव के पहले हुए इस उलटफेर से निकाय चुनाव के समीकरण निश्चित रूप से प्रभावित होगें। बहुजन समाज पार्टी की स्थानीय इकाई घनश्याम अनुरागी की आमद से नई ऊर्जा महसूस कर रही है।

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