उरई । पर्याप्त बरसात न होने का दंश अब जनपद के लोगों के लिये नासूर बनता जा रहा है। एक ओर जहां लगातार जल स्तर नीचे गिरने से सरकारी व प्राइवेट नलकूपों का संचालन तभी संभव हो रहा है जब उनमें पाइप बढ़ाये जा रहे हैं। हालात यह है कि जिले में 15 से 20 फिट जल स्तर गिर चुका है। तो जल संस्थान कोटरा में जलापूर्ति के लिये लगा नलकूप ठप हो गया जिससे कोटरा में अब पेयजल का संकट खड़ा हो गया है।
इस वर्ष मानसून की निष्क्रियता से वैसे तो समूचे बुंदेलखं डमें औसत से कम बरसात हुई। तो रबी सीजन में किसानों को खेतों का पलेवा करने के लिये पानी की आवश्यकता होने से जैसे ही सरकारी व प्राइवेट नलकूपों का संचालन शुरू हुआ तो जल स्तर जिस तेजी से नीचे खिसकना शुरू हुआ उसे देख किसानों के होश उड़ गये। एक ओर जहां प्राइवेट नलकूपों का सकुशल संचालन करने के लिये किसान उनमें पाइप डालने को विवश हो रहे हैं तो वहीं नलकूल विभाग जिसके जनपद में 680 नलकूप संचालित होते हैं लगभग सभी नलकूपों में पाइप बढ़ाने की कवायद शुरू हो गयी। नलकूप विभाग प्रथम के एक्सईएन हरदेव व द्वितीय के अधिशासी अभियंता विनोद कुमार से जब इस संबंध में जानकारी चाही गयी तो उन्होंने भी जल स्तर में गिरावट होने की बात स्वीकारते हुये कहा कि वह लगातार जिन क्षेत्रों के नलकूपों में जल स्तर कम हुआ है वहां पर पाइप बढ़ाकर खेतों की सिंचाई कराने के प्रयासों में जुटे हुये हैं। उन्होंने यह भी बताया कि चूंकि इस वर्ष पर्याप्त पानी न बरसने से जल स्तर तो खरीफ सीजन में ही नीचे गिरना शुरू हो गया था लेकिन उस दौरान ज्यादातर नलकूपों का संचालन बंद रहा तो इसकी जानकारी नहीं मिल पायी थी। लेकिन जैसे ही सरकारी व प्राइवेट नलकूपों का संचालन एक साथ शुरू हुआ तो जल स्तर में गिरावट होने की बात सामने आ गयी। जल स्तर में लगातार गिरावट होने के संबंध में जब जल संस्थान के एक्सईएन मनोज कुमार आर्य से जानकारी चाही तो उन्होंने बताया कि हमारी कोटरा जलापूर्ति के लिये स्थापित एक नलकूप का संचालन पूरी तरह से ठप हो चुका हैं अब वहां पर एक ही नलकूप से जलापूर्ति संभव होगी। कुल मिलाकर जिस तेजी के साथ जनपद में जल स्तर नीचे गिरने का सिलसिला शुरू हुआ है यदि आने वाले समय में यही स्थिति बनी रही तो निश्चित रूप से जलापूर्ति करने वाले नलकूपों के संचालन पर भी संकट के बादल मंड़राने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।







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