कोंच-उरई । वनवासी राम अयोध्या छोड़ कर वन के लिये प्रस्थान करते हैं और गंगापार जाते हैं। वहां केवट के साथ उनका बड़ा ही मार्मिक और भक्तिपूर्ण संवाद होता है। इधर, राम वनवास के कारण राजा दशरथ अशक्त होकर रनिवास में शैया पर पड़े राम राम का उच्चारण कर रहे हैं और उन्हें श्रवणकुमार के अंधे माता-पिता द्वारा दिया गया श्राप बार बार स्मरण हो रहा है। राम के वन जाने से दुखी दशरथ का अंतत: निधन हो जाता है और कुलगुरु बशिष्ठ ननिहाल से भरत-शत्रुघ्न को बुलाने के लिये दूत भेजते हैं। भरत ने अयोध्या आकर जब राम के वनवास की खबर सुनी और इसका कारण माता कैकेयी को जाना तो उन्होंने अपनी माता को खूब बुरा भला कहा। गुरु के आदेश पर भरत अपने दिवंगत पिता का अंतिम संस्कार करते हैं। यह प्रसंग बीती रात श्री नवलकिशोर रामलीला समिति के तत्वाधान में जारी रामलीला महोत्सव के दौरान बीती रात्रि बजरिया मंच पर मंचित किया जाता है। दशरथ का किरदार रमेश तिवारी, सुमंत्र रामप्रकाश पाटकार, बशिष्ठ पंकज वाजपेयी, भारद्वाज ऋषि सोनू दुवे, केवट अयोध्या कुशवाहा, कैकेयी सूरज शर्मा, कौशल्या हरीमोहन तिवारी, सुमित्रा लला वाजपेयी, निषादराज मोनू ठाकुर ने निभाये।

 

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