उरई। लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने छोटी-बड़ी रियासतों को तोड़कर एक अखण्ड भारत की स्थापना की। सरदार पटेल राष्ट्रीय एकता और अखण्डता के प्रबल समर्थक थे। इसी कारण स उनके जन्म दिवस 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता और अखण्डता दिवस के रूप में मनाया जाता है।
उक्त बात जिलाधिकारी डा. मन्नान अख्तर ने आज पीली कोठी पटेल पार्क उरई पर आयोजित सरदार पटेल जयन्ती के अवसर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के उपरान्त कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल जीवन पर्यन्त राष्ट्रीय एकता और अखण्डता के लिए संर्घर्ष करते रहें। देश के प्रति उनकी निष्ठा और लगन के परिणाम है कि भारत देश विश्व में धर्म निरपेक्ष देश तथा अखण्डता भारत के रूप में जाना जाता है। सरदार पटेल एक मात्र ऐसे व्यक्ति है जिन्हें लौहपुरूष का स्थान प्राप्त है। पटेल जी ने तत्काल निर्णय लेने की असीम क्षमता थी। देश की आजादी की लड़ाई में अग्रेजों की बहुत यातनायें फिर उनका देश पे्रम सर्वापरि रहा। देश के आजाद होने के बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल देश प्रथम गृहमंत्री बनाये गये थे। उस समय भारत वर्ष में छोटी-छोटी तमाम सियासतें काबिज थी। जिन्हें तोड़कर अखण्ड भारत की स्थापना हेतु उन्हें कुछ कड़े निर्णय लेने पड़े थे। उन्होंने भारत की एकता के लिए यह कठोर कदम उठाकर रियासतों को समाप्त कर भारत देश का निर्माण किया है। उन्हें अन्दर देश भक्ति अटूट थी। उन्होंने अपने लिए कभी कुछ नहीं किया जो किया जो देश के लिए तथा देशवासियों की सुख सुविधा के लिए फैसले लिए। वह जानते थे कि यदि देश छोटी-छोटी रियासतों में बटा रहेगा तो इसकी एकता और अखण्डता को हमेशा खतरा बना रहेगा और लोग आपस में अपने वर्चस्व के लिए लड़ते रहेंगे। इसलिए उन्होंने रियासतों को समाप्त कर अखण्ड भारत की स्थापना की। उन्होने कहा कि हमे वैचारिक मतभेदों को दर किनार करके भारत को विश्व के एक सर्वोच्च शिखर लाना है और यह तभी सम्भव है जब सभी देशहित के लिए समर्पित भावना रखेंगे। इस अवसर पर अपर पुलिस अधीक्षक सुरेन्द्र नाथ तिवारी, जिला विद्यालय निरीक्षक भगवत पटेल रामेश्वर त्रिपाठी, बलराम लम्बरदार, सुरेन्द्र निरंजन भईया जी, शालिकराम निरंजन, रामराजा, दिवेदी, राजवीर सिंह जादौन सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहें जिन्होंने भी अपने विचार व्यक्त किये गये। छात्र-छात्राओं द्वारा प्रभात फेरी निकाली गई।







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