0 बेरी वाले बाबा का दो रोजा उर्स सम्पन्न
उरई। हजरत गाजी मंसूर अली शाह उर्फ बेरी वाले बाबा के दो रोजा 77वें उर्स के दूसरे और आखिरी दिन गुरुवार की रात से शुक्रवार की सुबह तक समां बंधा रहा। जायरीन जहां कब्बालों द्वारा पेश कलामों की गहराइयों में खोकर झूमते रहे। वहीं कुल शरीफ की फातिया के दौरान वे अपने आंसू भी नही रोक सके। जायरीन रात भर अकीदत का नजराना पेश करते रहे।
दो रोजा उर्स के आखिरी दिन भारी भीड़ उमड़ी। बाबा की दरगाह पर हाजिरी देने वालों का तांता लग गया। फातिया ख्वानी के साथ दरुदो सलाम को पेश किया गया। महफिले शमां की शुरूआत कुरान पाक की आयत पढ़कर कारी मेहताब ने की। जिसके बाद कब्बाली का कड़ा मुकाबला हाजी छोटे मजीद शोला मुंबई और अजीम नाजा मुंबई के बीच शुरू हुआ। दोनों ही फनकारों ने अपने बेहतरीन कलामों का मुजाहरा किया। जिनकों सुनकर श्रोता झूमने पर मजबूर हो गये।
मुकाबले की शुरूआत में मजीद शोला ने कहा ये दो लफ्ज सारे लफ्जों से बेहतर, अल्लाहु अकबर-अल्लाहु अकबर। इसके बाद नात पढ़ी जिसमें कहा पूंछेगे सभी हस्र में सरकार कहां, सरकार पूंछेगे गुनहगार कहां। जबाबी मुकाबले में मुंबई के फनकार अजीम नाजा ने भी अपने कलाम से करारा जबाब दिया। जिसमें उन्होंने नात पेश करते हुए कहा नबियों के शाह अहमद मुख्तार के लिए हर शै बनी है बस मेरे सरकार के लिए। इसके बाद उन्होंने कहा दौलत से न ताकत से भारत चलता ख्वाजा से।
इस बेजोड़ मुकाबले को सुनने के लिए लोग अपनी जगह पर डटे रहे और अपनी फरमाइश के मुताबिक कलाम सुनते रहे। इस बीच वह रूहानी मंजर आया जब अकीदतमंदों की आंखों से आंसुओं का सैलाब बह उठा। बाबा की कुल शरीफ की फातिहा के दौरान लोग भावुक हो उठे।
जायरीनों के लिए जगह-जगह लंगर के आयोजन किये गये। जिसमें जमकर लंगर को छका गया। उर्स में आये हुए मेहमानों का चीफ कंट्रोलर हाफिज अब्दुल जब्बार और कमेटी के अध्यक्ष अनिल चतुर्वेदी ने पगड़ी बांधकर स्वागत किया। इस बीच मुनीर सुनार, मुन्ना आढ़ती, अब्दुल रब, जुल्फिकार अहमद उर्फ सज्जन, बृजेश मिश्र, अकील अहमद, रिजवान खान, भिक्खे खां, सत्तार शाह, छोटू शाह, जगत नारायण सहित तमाम विशिष्ट लोग उपस्थित रहे।







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