उरई। जालौन नगर पालिका के चुनाव में बागी प्रत्याशी दलीय उम्मीदवारों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। लगभग सभी दल यहां बागियों की समस्या से जूझ रहे हैं। इंतजार नाम वापसी का है जिसमें विभिन्न पार्टियों के दिग्गजों के बूते का पता चलेगा कि उनमें से कौन अपने बागियों के पर्चे वापस कराने में सफल होते हैं।

जालौन नगर पालिका में अध्यक्ष पद के चुनाव में इस बार जबर्दस्त घमासान है। यहां लगभग 44 हजार मतदाता है। प्रमुख दलीय प्रत्याशियों में सपा से चंद्रप्रकाश उर्फ थोपन यादव, भाजपा से गिरीश गुप्ता, कांग्रेस से शाकिर हसन बारसी, बसपा से प्रेम कुमार गुप्ता चुनावी दंगल में ताल ठोक रहे हैं। पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष स्व. राधेश्याम इटइया के पुत्र प्रद्युम्न दीक्षित भी बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा के बैनर पर जोर आजमाइश के लिए चुनाव मैदान में उतरे हैं।

कांग्रेस ने पहले अब्दुल बाहिद को उम्मीदवार बनाया था लेकिन ऐन मौके पर वे बीमार पड़ गये। इसलिए शाकिर को सिम्बल थमा दिया गया। हालांकि कई बार वार्ड सदस्य रह चुके शाकिर अध्यक्ष पद के लिए शुरू से ही बसपा से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। लेकिन बाद में बसपा ने उनको अंगूठा दिखा दिया जिसके चलते उन्होंने बसपा से विद्रोह कर दिया।

बसपा मे इसके चलते उठा-पटक मची है। पार्टी ने जिन प्रेम कुमार गुप्ता को प्रत्याशी बनाया है उनके भाई रामकुमार गुप्ता सिरसा कलार से जिला पंचायत सदस्य हैं। इसलिए उन्हें कोई नगरवासी मानने को तैयार नही है। शाकिर के विद्रोह के अलावा बसपा के बेस वोट ने भी यहां बगावती तेवर अपना रखे हैं। गैस एजेंसी मालिक प्रभुदयाल भाटिया द्वारा निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पर्चा भरते समय चर्मकार समाज के लोगों की भारी भीड़ को देखते हुए बसपा के रणनीतिकारों ने खलबली मची है।

उधर सपा की हालत भी बहुत दुरुस्त नही है। चंद्रप्रकाश यादव को फरहा नाज प्रकरण की वजह से मुसलमानों की पार्टी से गोपनीय नाराजगी का खामियाजा भोगना पड़ रहा है। उस पर तुर्रा यह है कि यहां सपा के नगर अध्यक्ष इकबाल मंसूरी ने पार्टी से विद्रोह कर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में दावेदारी पेश कर रखी है।

भाजपा में जिले भर में वैश्य बनाम ब्राहमण के मुददे ने हवा पकड़ ली है जिससे जालौन में पार्टी के प्रत्याशी गिरीश गुप्ता को भी स्वच्छ छवि के बावजूद मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। वार्डों के प्रत्याशियों को लेकर अलग असंतोष उनके लिए कोढ़ मे खाज का काम कर रहा है। वार्ड-22 में पार्टी ने आईटी सैल के प्रभारी के भांजे अभिषेक गुप्ता को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी कार्यकर्ताओं को यह रास नही आ रहा क्योकि उनकी उम्मीदवारी पार्टी के जिला कार्यसमिति के सदस्य की कीमत पर तय की गई है जिन्हें जमीनी नेता माना जाता है। उनके बाबा केडी रामदास के समय से इस वार्ड के इलाके में उनके परिवार का वर्चस्व रहा है। भाजपा के लिए विद्रोही प्रत्याशी शशांक चौहान  उर्फ सोनू चौहान की उम्मीदवारी भी मुश्किल पैदा कर रही है। ऐसे में समीकरण बेहद जटिल हो गये हैं। चुनावी ऊंट किस करवट बैठेगा इस आंकलन के लिए राजनैतिक पंडितों को काफी माथा पच्ची करनी पड़ रही है।

 

 

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