
उरई। राज्य के सूचना आयुक्त गजेंद्र यादव ने शनिवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में सभी विभागाध्यक्षों के साथ बैठक करके उन्हें आगाह किया कि वे 15 दिन के अंदर अपने कार्यालय के बाहर तख्ती टकवाना सुनिश्चित करें जिसमें विभाग के जनसूचना अधिकारी प्रथम अपीलीय अधिकारी व द्वितीय अपीलीय अधिकारी के नाम और उनके मोबाइल नंबंर अंकित हों।
जनसूचना अधिकार अधिनियम को लागू करने के लिए जिलों में आधारभूत ढांचा सुसज्जित करने के मामले में एक दशक से अधिक समय गुजर जाने के बावजूद व्यवस्थायें पूरी नही की जा सकी हैं। जबकि सूचना आयुक्त बार-बार इसके लिए निर्देश देते रहे हैं। आज उन्होंने कहा कि वे केवल एक पखवारे का मौका और दे रहे हैं इसके बाद कोताही पर कड़ी कार्रवाई होगी।
उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक सहित सभी कार्यालयों में जनसूचना का रजिस्टर अलग से होना चाहिए जिसमें सूचना का आवेदन पंजीकृत किया जाये। साथ ही उसकी अद्यतन स्थिति भी कालम बनाकर स्पष्ट की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत सचिव के स्तर पर मामले सबसे ज्यादा लंबित हो रहे हैं। प्रत्येक सचिव को भी जनसूचना का रजिस्टर बनाना होगा और तबादला होने पर इसका चार्ज अलग से अपने रिलीवर को सौपना होगा।
उन्होंने कहा कि जनसूचना देने में चालबाजी बर्दास्त नही की जायेगी। निर्धारित 30 दिन के अंदर अगर जनसूचना के आवेदन का निस्तारण नही होता तो इसके बाद फोटो स्टेट कापी या अन्य के लिए शुल्क की मांग मान्य नही की जायेगी। उन्होंने कहा कि भ्रामक सूचनाएं देने पर आवेदक को यह उल्लेख करते हुए कि भ्रामक क्या है अपीलीय अधिकारी के सामने अपील करनी चाहिए। अगर उनकी दलील सही है तो गलत सूचना देने वाले अधिकारी पर कार्रवाई होगी।
बाद में उन्होंने पत्रकारों को बताया कि जिले की 430 अपीलें सूचना आयोग में लंबित हैं जिनमें सबसे ज्यादा 103 अपीलें ग्राम विकास विभाग की हैं। इनकी सुनवाई लखनऊ में 26 फरवरी को होगी। इसके पहले राजस्व की 64 अपीलों की सुनवाई 21 फरवरी को और बेसिक शिक्षा की 49 व लोक निर्माण विभाग की 27 अपीलों की सुनवाई 27 फरवरी को की जायेगी।
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक अमरेंद्र प्रसाद सिंह, अपर जिलाधिकारी आरके सिंह, मुख्य विकास अधिकारी एसपी सिंह व अन्य सभी विभागाध्यक्ष मौजूद थे।







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