उरई। आदर्श स्टेशन का दर्जा प्राप्त स्थानीय रेलवे स्टेशन अव्यवस्थाओं के चलते सिसक रहा है। स्टेशन परिसर में प्रवेश करते ही शुरू से बंद चला आ रहा फब्वारा सौंदर्यीकरण के नाम पर हुई बजट की बर्बादी की कहानी कहता है।

स्टेशन के भीतर भी कोई पुरसा हाल नही है। यात्रियों को परेशान भटकना पड़ता है क्योंकि पूंछतांछ काउंटर में बैठना कोई कर्मचारी गंवारा नही करता। उधर अलग-अलग एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म तक जाने के लिए ओवर ब्रिज चढ़ने की बजाय यात्री बेखौफ होकर सीधे पटरी पार करते हैं। जिससे गंभीर हादसा हो सकता है।

 

स्टेशन पर स्लीपर में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए कोई प्रतीक्षालय नही है। प्रथम श्रेणी यात्रियों के प्रतीक्षालय में ही इस कारण जमघट बना रहता है। विकलांगों के लिए भारी परेशानी है क्योकि प्लेटफार्म पार करने के लिए उनकी कोई व्यवस्था नही है। स्टेशन के प्रवेश द्वार पर उरई स्टेशन के डिसप्ले बोर्ड में रोशनी बंद हो गई है जो मनहूसियत फैला रही है। हालांकि स्टेशन अधीक्षक ने कहा कि एक-दो कमियां हो सकती हैं लेकिन कुल मिलाकर उनका स्टेशन पूरी तरह सुसज्जित है।

 

ट्रेनों की लेटलतीफी

कोहरे का प्रकोप न होने के बावजूद कई-कई घंटे ट्रेनों की लेटलतीफी आम बात हो चुकी है। जिससे यात्रियों को मजबूरी में रेल के सफर से मुंह मोड़ना पड़ रहा है। जानकारी की तो पता चला कि 14 जनवरी को झांसी-लखनऊ इंटरसिटी एक्सपे्रस साढ़े तीन घंटे लेट आई थी तो 2184 लखनऊ-भोपाल एक्सपे्रस तीन घंटे, लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस भी साढ़े तीन घंटे लेट रही जबकि साबरमती और कोचीन एक्सप्रेस 2511 ने तो रिकार्ड ही तोड़ दिया दोनों ट्रेने 11-11 घंटे लेट आईं। इसी तरह 15 जनवरी को 1016 कुशीनगर एक्सप्रेस चार घंटे, 2541 लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस साढ़े तीन घंटे, बैरकपुर एक्सप्रेस 9 घंटे और दरभंगा से अहमदाबाद एक्सपे्रस 15 घंटे विलंब से पहुंची। 16 जनवरी को 2541 साबरमती एक्सप्रेस साढ़े चार घंटे लेट रही। बुधवार को भी ज्यादातर ट्रेने विलंब से गुजरीं।

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