उरई। सार्वजनिक बैंके धोखाधड़ी का अडडा बन गई हैं। इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक की पिरौना शाखा से एक दलित की कई वर्ष की गरीब पेंशन धोखाधड़ी करके निकाल ली गई। पीड़ित ने गुरुवार को जिलाधिकारी की अनुपस्थिति में सिटी मजिस्ट्रेट को शिकायती पत्र देकर इसका खुलासा किया। अब देखना है कि अधिकारी इसकी पड़ताल कर धोखाधड़ी करने वाले बैंक स्टाॅफ को जेल भेजेगें या गरीब का मामला समझकर इसकी लीपापोती कर दी जायेगी।
कोटरा थाने के छिरावली के निवासी सुरेश चैधरी ने बताया कि उसकी पेेंशन 2011 में मंजूर हो गई थी। मायावती शासन के बाद अखिलेश शासन में पेंशन योजना का नाम बदलकर समाजवादी पेंशन योजना कर दिया गया। जबकि वह समझता रहा कि उसकी पेंशन बंद हो गई है। उधर बैंक ने उसका खाता खोलने में भी लंबे समय तक टाल-मटोल की। बमुश्किल 2015 में वह अपनी पासबुक बनवा पाया।
इस बीच वर्ष 2016 में जब उसके पास समाजवादी पेंशन योजना का पत्र आया तो उसे जानकारी हुई कि उसकी पेंशन तो बराबर चालू है। जब वह बैंक गया तब उसे पता चला कि उसकी पेंशन बैंक कर्मचारियों ने उसकी जानकारी के बिना निकालकर हड़प ली है। सिटी मजिस्ट्रेट ने जांच का आदेश दे दिया है।







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