उरई। जिले में सहकारी समितियों में खाद का अकाल है जिसके कारण किसानों को मंहगे दामों पर प्राइवेट डीलरों से डीएपी खरीदनी पड़ रही है। कई सहकारी समितियों के गोदामों में खाद न होने की वजह से ताले पड़े हैं। अमखेड़ा के सहकारी गोदाम में पड़ा ताला इसकी गवाही देता है।

जिले इस समय बुबाई का सीजन चल रहा है। हलना प्रजाति के गेंहूं की बुबाई किसान मटर तुड़ाई के बाद 30 जनवरी तक करते हैं। मैंथा की भी कलम रोपी जा रही है। सब्जी करने वाले किसान भी परेशान हैं। इस मौके पर हर किसान को डीएपी की बहुत जरूरत है। लेकिन सहकारी समिति में खाद की मांग पर हाथ उठा दिये जाते हैं। जबकि योगी सरकार किसानों के हितों की सबसे पहले रखवाली का ढिढोरा पीट रही है। हर महीने किसान दिवस आयोजित होता है जिसमें दावा रहता है कि किसानों की समस्याओं को इसके माध्यम से प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जा रहा है। लेकिन अगर ऐसा होता तो खाद जैसी बुनियादी जरूरत के लिए भी किसान को क्यों भटकना पड़ता।

उधर प्राइवेट डीलर खाद की एक बोरी पर 50 रुपये से 150 रुपये तक बेसी मूल्य वसूल रहे हैं। वैसे भी खेती की लागत तो बढ़ती जा रही है जबकि उपज के दाम नही मिल रहे। जिससे खेती छोड़ने वाले किसानों की संख्या बाढ़ पर है। जिम्मेदार फिर भी सबक लेने को तैयार नही हैं।

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