स्व. डॉ. लल्ला सिंह राठौड़ की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा, किसान संवाद एवं सम्मान समारोह आयोजित
माधौगढ़, जालौन। समाजसेवी स्व. डॉ. लल्ला सिंह राठौड़ की पुण्यतिथि पर उनकी स्मृति को नमन करते हुए श्रद्धांजलि सभा, किसान संवाद एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जैविक खेती और जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाकर बेहतर कार्य कर रहे महिला एवं पुरुष किसानों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्व. डॉ. लल्ला सिंह राठौड़ के सामाजिक सरोकारों और जनसेवा के कार्यों को याद करते हुए कहा कि समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आज भी लोगों को प्रेरित करती है। उनके विचारों और सेवा भावना को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
परमार्थ के निदेशक अनिल सिंह ने कहा कि बुंदेलखंड की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों में खेती को टिकाऊ तथा लाभकारी बनाने के लिए किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक कृषि पद्धतियों की ओर बढ़ना होगा। पानी की कमी, बदलता मौसम और लगातार बढ़ती कृषि लागत के बीच कम लागत वाली कृषि पद्धतियां किसानों की आय के साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मददगार हो सकती हैं।
संस्था के सचिव डॉ. संजय सिंह ने कहा कि बुंदेलखंड की पहचान केवल जल संकट और कृषि संबंधी चुनौतियों से नहीं, बल्कि यहां के मेहनतकश और जुझारू किसानों से भी है। जल संरक्षण, जैविक खेती और पर्यावरण अनुकूल कृषि को बढ़ावा देकर खेती को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसानों के स्थानीय अनुभव और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ना इस दिशा में महत्वपूर्ण होगा।
रामकृष्ण शुक्ला ने कहा कि जल संकट, बदलता मौसम और खेती की बढ़ती लागत बुंदेलखंड के किसानों के सामने बड़ी चुनौती हैं। ऐसे में प्राकृतिक एवं जैविक खेती के साथ पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का समन्वय खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बना सकता है।
किसान संवाद में जल संरक्षण, जैविक खेती और जलवायु परिवर्तन के अनुरूप कृषि पद्धतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जीवामृत, वर्मी कम्पोस्ट, पंचपत्ती काढ़ा, स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई जैसी तकनीकों तथा जैविक तरीकों के इस्तेमाल से कृषि लागत कम करने और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल रही है। कुछ किसानों ने जैविक बागवानी, पपीते की खेती और नर्सरी के माध्यम से अतिरिक्त आय के मॉडल भी विकसित किए हैं।
समारोह में शिवकुमार व राम बिहारी (मदेपुरा), मंगल कुशवाह (हुसेपुरा जागीर), गोविंद (हिम्मतपुर), राज कुमार (जाजेपुरा), महेश (जगम्मनपुर), जितेंद्र कुमार (डिकौली जागीर), जगत सिंह (गोपालपुरा), संतोष (सुरावली), अखिलेश व सोमवती (मल्हानपुरा), मंजू (महटौली), शांति (शिवगंज कनार) तथा गुड्डी (पचोखरा) सहित जैविक एवं बेहतर कृषि कार्य करने वाले किसानों को सम्मानित किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि बुंदेलखंड में जल, जंगल, जमीन और खेती को अलग-अलग नहीं, बल्कि एक समग्र व्यवस्था के रूप में देखने की जरूरत है। किसानों की सक्रिय भागीदारी और सामुदायिक प्रयासों से ही क्षेत्र में जल संरक्षण तथा जलवायु अनुकूल कृषि को स्थायी आधार दिया जा सकता है।
कार्यक्रम में शीतल सिंह सेंगर, पत्रकार अनिल शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार दीपक अग्निहोत्री, डीडीएम नाबार्ड नरेंद्र सिंह राजावत सहित डॉ. संजय सिंह, अनिल सिंह और अन्य गणमान्य अतिथि तथा बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों एवं किसानों के प्रति आभार व्यक्त किया।







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