उरई। नगर निकाय चुनाव में भाजपा को कालपी विधान सभा क्षेत्र की कालपी व कदौरा में मिली मात के बाद अब भाजपा के कालपी विधायक नरेन्द्र सिंह जादौन की विधानसभा के दो-दो ब्लाकों के प्रमुख पदो के अविश्वास की एक बार फिर चुनौती मिल गई है। यदि पार्टी ने फिर भी गंभीरता से न लिया तो किरकिरी होना तय है।
भाजपा में कालपी विधायक नरेन्द्र सिंह जादौन के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। उन्हीं की विधान सभा में कदौरा व कुठौंद ब्लाकों में अविश्वास प्रस्ताव की तारीखे तय हो गयी है। अब भाजपा विधायक को दोनों ब्लाकों में अविश्वास प्रस्ताव को पारित कराकर अपनी ताकत दिखाना मजबूरी हो गयी है। क्योंकि कालपी विधान सभा क्षेत्र की भाजपा का पार्टी हाईकमान में यह संदेश पहले से ही है कि नगर निकाय चुनाव में कालपी नगर पालिका व कदौरा नगर पंचायत में विधायक के मन माफिक टिकट न होने की वजह वह अपने को लो प्रोफाइल मानकर शांत से हो गए थे। जिसे पार्टी के कानपुर बुदंलेखंड क्षेत्रीय भाजपा कार्यालय ने ठीक नही माना था और बकायदे इसकी रिपोर्ट पार्टी हाईकमान को भेज दी थी। अभी नगर निकाय चुनाव की पराजय की आग ठंडी भी नही हुयी थी। कि इसी बीच पार्टी संगठन ने कदौरा ब्लाक प्रमुख विजय सिंह निस्वा व कुठौंद ब्लाक प्रमुख पुष्पा देवी यादव के विरूद्ध अविश्वास प्रस्ताव की तारीखे मुकर्रिर करा दी। कुछ समय के लिए तो भाजपा विधायक नरेन्द्र सिंह जादौन कुछ देर के लिए विचलित भी हुए कि दोनों ब्लाकों में अविश्वास प्रस्ताव वह भी मेरी विधान सभा में होना मेरे राजनैतिक कैरियर के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। इधर भाजपा के जिला व क्षेत्रीय संगठन ने भी साफ इशारा कर दिया है कि राजनैतिक वर्चस्व बढाने के लिए दोनों ब्लाकों में अविश्वास प्रस्ताव हरहाल में पारित होना चाहिए। क्योंकि दोनों सीटों पर सपा समर्थित ब्लाक प्रमुख काबिज है। सपा ने इस गढ को तोड़ने में भाजपा सत्ता के रसूख के साथ कामयाब हो सकती है। अब भाजपा विधायक नरेन्द्र सिंह जादौन ने तो अपने समर्थकों से कहना भी शुरू कर दिया है कि किसी तरह दोनों ब्लाकों में अविश्वास प्रस्ताव पास होना ही चाहिए।
सत्ता के सहारे अविश्वास की मुहिम
कुठौंद के राजू यादव व कदौरा के नरेन्द्र द्विवेदी मबई ने ही सत्ता व संगठन के सहारे अविश्वास प्रस्ताव की मुहिम को हवा दी। इस मुहिम के अंजाम तक पहुंचाने के लिए सपा को आउट करने के लिए अन्य दलों का भी इन भाजपा नेताओं को सहारा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। फिलहाल जो भी हो पहले 13 फरवरी को कुठौंद, व फिर 15 फरवरी को कदौरा में अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी को लेकर राजनैतिक हलचल तेज हो गयी है।







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