कोंच-उरई । कोंच का बहुचर्चित कोतवाली कांड पुलिस की बर्बर मानसिकता का जीता जागता उदाहरण है। पहली फरवरी बर्ष 2004 कोंच के इतिहास के पन्नों में काले दिन के रूप में दर्ज है। इसी दिन तत्कालीन कोतवाल डीडीएस राठौर ने क्षेत्र की तीन हस्तियों को निर्दोष होते हुये भी केवल इसलिये मौत के घाट उतार दिया था कि उन्होंने कोतवाल की निरंकुशता और मनमानी पर सवाल खड़े करने और निर्दोषों को रात भर लॉकअप में बंद रखने का विरोध किया था।

चौदह साल का लंबा अंतराल गुजर जाने के बाद भी यहां के लोगों के जेहन में पहली फरवरी 2004 की वह घटना आज भी ताजा है जब कोतवाली में महेन्द्रसिंह निरंजन, सुरेन्द्रसिंह निरंजन और दयाशंकर झा को पुलिस कोतवाल ने बड़ी बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया था। उक्त घटना को अनहोनी समझ कर भुलाने के लिये चौदह साल का लंबा समय भले ही काफी माना जाता हो लेकिन उन घावों के निशानों का क्या जो जब भी सामने आते हैं, उस काले दिन की बुरी यादें बरबस ही लोगों के  जेहन में उतर कर रीढ में सिहरन पैदा कर देती हैं। दरअसल, 31 जनवरी 2004 की रात तत्कालीन कोतवाल डीडीएस राठौर ने बरिष्ठ सपा नेता और एमपीडीसी प्रबंध समिति के तत्कालीन मंत्री सुरेन्द्रसिंह निरंजन के दामाद शिवकुमार निरंजन को अकारण ही रात भर कोतवाली के लॉकअप में बंद रखा था और पहली फरवरी को जब कोतवाल से इसका हिसाब मांगा गया तो उन्हें इसमें अपनी तौहीन लगी। कोतवाल ने सुरेन्द्रसिंह निरंजन, उनके बड़े भाई रोडवेज कर्मचारी यूनियन के मंडलीय पदाधिकारी महेन्द्रसिंह निरंजन तथा उनके अभिन्न मित्र दयाशंकर झा पर कोतवाली में गोलियों की बौछार कर तीनों को मौत की नींद सुला दिया था। इस घटना के बाद तो जैसे जिले भर में आग सी लग गई और जगह जगह धरना प्रदर्शन आगजनी आदि की घटनाओं से पूरा जिला कई दिनों तक सहमा रहा था। कोतवाली में घटी उस काली वारदात के बाद भले ही जाने बाले बापिस न आ सकें लेकिन उनके कृत कार्यों को याद कर इलाकाई लोग आने बाली पीढियों को पुलिस की ज्यादती के खिलाफ आवाज बुलंद करने की नसीहत जरूर देते हैं। कल कोतवाली कांड की चौदहवीं बरसी पर तीनों शहीदों के नाम पर संचालित महेन्द्रसिंह, सुरेन्द्रसिंह, दयाशंकर मेमोरियल महाविद्यालय तीतराखलीलपुर में उन्हें याद करने के लिये कार्यक्रमों की लंबी श्रृंखला हर साल तैयार की जाती है। कोंच में भी कई कार्यक्रम आयोजित कर लोग उन तीनों रणबांकुरों की हिम्मत को लगातार याद कर नई पीढी को नसीहत देते हैं जुल्म और ज्यादती के खिलाफ आबाज बुलंद करने की।

 

Leave a comment