कोंच-उरई । किसानों को उनकी उपज का बाजिब मूल्य मिल सके इसके लिये सरकार ने सरकारी क्रय केन्द्र खोले हैं लेकिन इन केन्द्रों पर पसरा सन्नाटा इस बात की चुगली कर रहा है कि किसानों को इन सरकारी केन्द्रों के बजाये आढतियों पर ज्यादा भरोसा है इस लिये वे इन सरकारी केन्द्रों से दूरी बनाये हैं। हालांकि यहां इस इलाके में ये जिंसें बहुत ही कम मात्रा में पैदा होती हैं जिसके चलते भी केन्द्र पर सूनर पसरना स्वाभाविक है। इस स्थिति में सुधार लाने के लिये जिलाधिकारी ने तहसीलदार की डृयूटी जरूर क्रय केन्द्र पर पूरे समय के लिये फिक्स की है लेकिन यक्ष प्रश्न फिर वही है कि आखिर तहसीलदार कहां से किसानों को ढूंढ कर इन केन्द्रों तक लायेंगे।

स्थानीय मंडी में स्थित पीसीएफ परिसर में सरकारी उर्द-मूंग क्रय केन्द्र खोला गया है जिसका संचालन नैफेड कर रहा है। गुजरी आठ जनवरी से प्रारंभ हुये इस क्रय केन्द्र के कार्य करने की मियांद इकत्तीस जनवरी को समाप्त भी हो रही है, यानी सिर्फ चौबीस दिन और आज के बाद इस पर खरीद बंद हो जायेगी। केन्द्र संचालक अवधलाल से मिली जानकारी में बताया गया है कि अभी तक इस केन्द्र पर एक भी दाने की खरीद संभव नहीं हो सकी है। आवक नहीं होने के पीछे तर्क यह भी दिया जा रहा है कि इस इलाके में उर्द मूंग की पैदावार न के बराबर होती है जिसके चलते बर्ष 2017 से अब तक केवल 196 कुंतल ही उर्द मंडी में आया है, जबकि सरकारी रेट उर्द और मूंग के क्रमश: 5400 तथा 5575 के सापेक्ष मंडी में भाव दो हजार रुपये नीचे हैं। इधर, प्रशासन को इस बात की आशंका रही कि कहीं खरीद प्रक्रिया में बिचौलिये तो नहीं अनुचित हथकंडों का इस्तेमाल करते हुये हाथ मार रहे हैं, सो जिलाधिकारी ने तहसीलदार भूपाल सिंह की ड्यूटी इस लिये क्रय केन्द्र पर शाम पांच बजे तक फिक्स कर दी कि अपनी मौजूदगी में केन्द्र का सही ढंग से संचालन करवायें लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। इन चौबीस दिनों में खरीद का आंकड़ा शून्य रहा जो कहीं न कहीं व्यवस्था को मुंह चिढाता सा लगता है।

 

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