उरई। गुरुवार को ई-रिक्शा चालकों पर पुलिस का कहर टूट पड़ा। एक हादसे का बहाना लेकर पुलिस ने रोड पर चल रहे 48 ई-रिक्शा पकड़कर सीज कर दिये। गौरतलब है कि काफी समय से टैंपो एसोसिएशन पुलिस से ई-रिक्शा का चालन नगर में बंद कराने के लिए सैटिंग में लगी हुई थी।

गुरुवार को एक ई-रिक्शा से किसी मोटर साइकिल की टक्कर हो गई। इसकी शिकायत पुलिस में पहुंचने के बाद सीओ सिटी संतोष कुमार ने ई-रिक्शों की पकड़-धकड़ का अभियान घंटाघर से शहीद भगत सिंह चैराहे तक चलवा दिया। 48 ई-रिक्शा इसमें पकड़े गये। जिसके बाद ई-रिक्शा चालकों में हाहाकार मच गया।

 

 

 

दिन भर कोतवाली के सामने रिक्शे छुड़ाने के लिए चालकों की गहमा-गहमी रही। कल्लू वर्मा, राजकिशोर, शंभू परिहार, विशाल चैधरी, रोहित गौतम आदि का कहना है कि उन लोगों ने कर्जें पर ई-रिक्शे खरीदे थे जिनकी किस्ते अभी बकाया हैं। उन्होंने कहा कि रिक्शे सीज होने पर उनके जैसे गरीब परिवारों के पेट पर लात पड़ेगी। आम लोगों को भी इससे परेशानी होगी। ई-रिक्शा चलने की वजह से शहर के अंदर उनके लिए आवागमन सुलभ था। साथ ही अपने पैरों से खींचकर रिक्शा चलाने की अमानवीय व्यवस्था भी इससे बदल गई थी। जो फिर से बहाल हो जायेगी।

ई-रिक्शा चालकों के साथ-साथ जन संगठनों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी पुलिस की कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताया है। लोगों का कहना है कि रोडवेज के अडडों पर डग्गामार चार पहिया वाहन खुलेआम चल रहे हैं लेकिन उन पर कार्रवाई करने की जहमत न पुलिस उठाती है और न परिवहन विभाग। क्योंकि इन गाड़ियों के मालिक लाखों के आदमी होते हैं। ई-रिक्शा वालों पर गरीब की जोरू समझकर दमन चक्र चलाया गया है। जहां तक हादसे का प्रश्न है नेशनल हाइवे तक पर आपे चल रहे हैं। सभी परमिट मार्गों पर कई किलोमीटर तक आपे पर सवारियां ढोई जा रहीं हैं। जिनसे आये दिन हादसे भी होते हैं। यहां तक कि मौते भी हो चुकी हैं। लेकिन इसके खिलाफ कोई अभियान चलाने की आज तक नही सोची गई। क्यों, इसकी वजह सब जानते हैं।

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