
उरई। उरई रेलवे स्टेशन पर संरक्षा से खिलवाड़ का मामला सामने आया है। यहां रेलवे ट्रैक के किनारे रखी गेहूं की बोरियां को लादने आई मालगाड़ी बोरियों से टकराकर डिरेल हो गई। हालांकि मामला यार्ड का होने के कारण ट्रेनों की आवाजाही में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई। लेकिन लगातार हो रहे डिरेलमेंट के मामले रेलवे अधिकारियों के दावों की पोल खोल रहे हैं।
मालगोदाम साइडिंग में बलिया जाने के लिए गेहूं के बोरियां रखी हुई थी। जिन्हें लाने के लिए 58 डिब्बों की मालगाड़ी आई थी। गुरुवार की सुबह जब मालगाड़ी का चालक एजाज अली व सहायक चालक रंजीत कुमार ट्रेन को लेकर साइडिंग में लेकर जा रहे थे। तभी सुबह 7ण्20 बजे ट्रैक से सटकर रखे गेहूं के बोरियों से दो डिब्बे टकराने से ट्रैक के किनारे रखे करीब ढाई सौ बोरी गेहंू फट गई और बोरियां से टकरा से दो डिब्बे लहराकर बेपटरी हो गए।
इससे यहां हडक़ंप मच गया। मौके पर तत्काल स्टेशन प्रबंधक एपी वर्माए आरपीएफ थानाध्यक्ष एके यादवए जीआरपी थानाध्यक्ष ब्रजमोहन सैनी अपनी टीम के साथ पहुंचे और झांसी मंडल के अधिकारियों को सूचना दी। इस पर वहां से डीएमई ;डिवीजनल मैकेनिकल इंजीनियरद्ध कौशल किशोर के नेतृत्व कर्मचारियों की टीम मौके पर रवाना हुई। टीम ने ओएचई लाइन बंद करवाकर काम शुरु कराया। करीब साढ़े चार बजे डिब्बे फिर से पटरी पर रखवाएं।
मालगाड़ी के चालक ने जांच टीम को बताया कि ट्रैक के किनारे गेहूं की बोरियां रखी हुई थी। जिन पर तिरपाल बंधी थी। शटिंग के दौरान किनारे रखी किसी बोरी से पीछे की सातवी बोगी टकरा गई। जिससे बोरियां भरभराकर डिब्बों पर गिरने लगी। जिससे ट्रेन डिरेलमेंट हो गई।
पंद्रह दिन में दूसरा हादसा
बीती 25 जनवरी को ट्रैक बदलने के लिए पटरी लादकर आई मालगाड़ी आटा रेलवे स्टेशन पर बेपटरी हो गई थी। उसके ठीस पंद्रह दिन बाद उरई में गेहूं लादने आई मालगाड़ी बेपटरी हो गई। लगातार हो रहे हादसे से संरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे है।
पांच सदस्यीय टीम ने बनाई जांच रिपोर्ट
घटना के बाद मुख्य वाणिज्य निरीक्षक डीके तिवारीए यातायात निरीक्षक पीके गुबरेलेए लोको निरीक्षक हेमंत कुमारए एसएसई रेलपथ केएल भारतीए एसएसई कैरिज एंड बैगिन नसीम अहमद की पांच सदस्यीय टीम ने मौके पर पहुंचकर ट्रेन के चालकए गाडऱ् व ड्यूटी पर तैनात स्टेशन कर्मचारियों के बयान दर्ज किए।
एफसीआई की थीं बोरियां
58 डिब्बों की ट्रेन में 43 डिब्बों में यूपी स्टेट बेयर हाउस का माल लदना था। जबकि 15 डिब्बों में भारतीय खाद्य निगम ;एफसीआईद्ध का माल लदना था। जिन बोरियों से डिब्बे टकराएए वे बोरियां एफसीआई की थी। जो बिल्कुल ट्रैक से सिर्फ एक फुट की दूरी पर रखी थी। जबकि नियमानुसार उन्हें ट्रैक से दो मीटर दूर रखना होता है। खाली डिब्बा करीब बीस टन का होता है। जबकि उसमें पचास टन से ज्यादा माल लाद दिया जाता है। डिब्बे का कुल बजन 70 टन होता है।
इलाहाबाद तक पहुंची गूंज
घटना की गूंज इलाहाबाद जोन तक पहुंच गई है। मामले की जानकारी मिलने पर उप मुख्य संरक्षा अधिकारी राजेश कुमार ने डिरेलमेंट की घटना को गंभीरता से लिया है। उन्होंने झांसी मंडल के अधिकारियों से मामले की पूरी रिपोर्ट तलब की है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी।
घटनाक्रम एक नजर में
7ण्20 बजे मालगाड़ी के दो डिब्बे पटरी से उतरे।
9ण्20 बजे बेपटरी हुई डिब्बों को काटकर अलग किया गया
9ण्45 बजे शेष गाड़ी को नई जगह व्यवस्थित किया गया
11 बजे झांसी से ट्रक लेकर टीम रवाना हुई
15 बजे टीम उरई पहुंची
15ण्15 बजे टीम ने काम शुरु किया
16ण्20 बजे टीम ने बेपटरी हुए डिब्बों को पटरी पर चढ़ाया।







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