उरई। किसानों की तबाही और खुदकुशी की लगातार खबरों के बावजूद सरकार उनकी जरूरतों की रखवाली के लिए संजीदा नही हो पा रही है। बुबाई के समय डीएपी का संकट रहा था तो अब गेंहूं में दूसरा पानी लगने के बाद किसान यूरिया के लिए परेशान है।
खेती के मामले में मौजूदा सरकार ने उपेक्षा और बदइंतजामी के सारे रिकार्ड तोड़ दिये हैं। मौजूदा फसल सीजन में गेंहूं की बुबाई सहकारी भण्डारों में डीएपी की कमी की वजह से प्रभावित हुई थी। इसके बावजूद सरकार की कसावट न होने के कारण लापरवाह अधिकारी फिर नही संभले।
हालत यह है कि इस समय गेंहूं में दूसरा पानी लग रहा है जिसके दौरान फसल में बाढ़ के लिए यूरिया की बेहद जरूरत है। पर सहकारी समितियों में यूरिया है कि मौके पर नदारत है। इसके कारण किसानों को प्राइवेट दुकानदारों की शरण में जाना पड़ रहा है। जहां उन्हें 330 रुपये की बजाय प्रति बोरी 400 रुपये कीमत चुकानी पड़ रही है। उस पर भी कई प्राइवेट दुकानदारों के बारे में शिकायत है कि वे मिलावटी खाद किसानों को थमा दे रहे हैं। लेकिन कृषि विभाग उन पर लगाम लगाने को तैयार नही है।
इस मुददे पर किसानों की कोसना प्रशासन के साथ-साथ सरकार के लिए भी कम नही देखी जा रही। आश्चर्य यह है कि किसानों में जबर्दस्त असंतोष को जानते हुए भी जिले के मगरूर जन प्रतिनिधि तक उनकी जरूरत पूरी करने का ख्याल नही कर रहे।






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