उरई। उन्नाव के बांगरमऊ में एचआईवी की सौगात बांटने वाले झोलाछाप डाक्टर का मामला सामने आने के बाद भी जिले में स्वास्थ्य महकमें की नींद नही टूटी। यहां सीएमओ कार्यालय के संरक्षण में गांवों में ही नही शहरों तक में स्वयं-भू निजी अस्पताल पनप रहे हैं। जिनकी अनदेखी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हर महीना जेबें गरम होने की वजह से करते हैं। जबकि इनके कारण आये दिन मरीज बेमौत मरते रहते हैं। ताजा मामला कालपी का है जहां एक फर्जी क्लीनिक में गलत उपचार की वजह से बुखार के शिकार युवक की अकारण मौत हो गई।
कालपी कोतवाली क्षेत्र के हल्का मगरौल के ग्राम कीरतपुर निवासी सूरज पाल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसका भाई जीत बहादुर उर्फ जीतू पाल (28वर्ष) बुखार से पीड़ित था। जिसके लिए लोगों के कहने पर वे उसे कालपी के मोहल्ला टरननगंज में क्लीनिक चलाने वाले डा. हर्ष अग्रवाल के यहां ले आये। वहां उसको भर्ती कर लिया गया। उपचार के दौरान डाक्टर कहीं चला गया और कंपाउंडरों के भरोसे उसके भाई को छोड़ गया। इस दौरान उसके भाई को गलत ट्रीटमेंट दे दिया गया जिससे उसकी हालत बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया।
प्रभारी निरीक्षक संजय गुप्ता ने इस शिकायत के आधार पर डा. हर्ष अग्रवाल के क्लीनिक पर फोर्स भेजकर शव अपने कब्जे में कर लिया और पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। पुलिस उपाधीक्षक सुबोध गौतम का कहना है कि छानबीन की जा रही है दोषी पाये जाने पर चिकित्सक और उसके स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। गौरतलब है कि अकेले कालपी नगर में दो दर्जन झोलाछाप डाक्टर अपनी फर्जी डिग्रियां लिखकर धड़ल्ले से अस्पताल चला रहे हैं। जिनके खिलाफ सीएमओ कार्यालय ने आज तक कोई एक्शन नही लिया है।

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