उरई। भू माफियाओं के खिलाफ सख्त अभियान की सरकार की डींग खोखली साबित हो रही है। शहर में करोड़ों रुपये की नजूल की भूमि की जालसाजी से बिक्री की गंभीर शिकायत पर प्रशासन के निष्क्रिय रुख से अंदाजा लगाया जा रहा है कि सरकार इन मामलों की खोज-खबर में कोई दिलचस्पी नही ले रही है।
मालूम रहे कि राजाराम पुत्र तुलसीराम ने गत 11 फरवरी को प्रदेश सरकार के जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत कर आरोप लगाया था कि शहर के मौजा लहरियापुरवा में नजूल भूखंड संख्या 521 में 9 एकड़ 22 डिसमिल जमीन का फर्जी बैनामा भू माफियाओं ने 24 मई 2017 को कर दिया था। शिकायत में के्रता-विक्रेताओं के नाम भी पते समेत लिखे थे।
लहरियापुरवा में शहर का हृदय स्थल होने से जमीन की कीमत बहुत ज्यादा है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि लगभग 10 एकड़ जमीन की कीमत करोड़ों में होगी। सरकार को इतना बड़ा चूना लगाने के मामले में फौरन जांच कर प्रभावी कार्रवाई की जानी चाहिए थी।
लेकिन मौजूदा राज्य सरकार की अधिकारियों के भरोसे चलने की नीति की वजह से जन सुनवाई पोर्टल मजाक बन कर रह गया है। किसी भी शिकायत के मामले में कोई कार्रवाई तब तक नही होती जब तक अधिकारी नही चाहते। भले ही कितनी भी बड़ी कोताही या भ्रष्टाचार क्यों न हो। अधिकारियों को यह एहसास है कि वे नीचे से जो रिपोर्ट भेज देगें वही ऊपर आंख मूंद कर मान ली जायेगी। इसलिए वे मनमानी रिपोर्ट देने में कोई खौफ महसूस नही करते।
उक्त मामले में जिला प्रशासन को 6 मार्च तक आख्या देने के लिए कहा गया था। लेकिन बताते है कि अभी तक यहां से कोई आख्या अपलोड नही हुई है जबकि भू माफियाओं के खिलाफ अभियान सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। जन चर्चा यह है कि राजस्व के अधिकारी जांच रिपोर्ट तो तैयार कर चुके हैं लेकिन माफियाओं से सौदेबाजी के चलते उन्होंने रिपोर्ट को दबा रखा है। सरकार के इस रंग-ढंग से वे लोग बहुत मायूस हैं जो प्रदेश के निजाम में बदलाव के बाद फटाफट कार्रवाई की उम्मीद लगाये बैठे थे।







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