कालपी-उरई। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में फुल प्रूफ इंतजाम के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। कोटेदारों की मनमानी की वजह से खाद्य सुरक्षा के तहत कबर किये गये गरीब खाद्यान्न के लिए भटकने से छुटकारा हासिल नही कर पा रहे हैं।
इसकी एक बानगी उस समय सामने आई जब क्रास चैकिंग में कोटेदारों के यहां काफी गड़बड़ी पायी गई। नतीजतन एक का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया तथा चार कोटेदारों को नोटिस थमाये गये हैं। इस कार्रवाई से कोटेदारों में खलबली मच गई।
मालूम रहे कि नगरीय क्षेत्र में सस्ते गल्ले के दुकानदारों को पूर्ति विभाग की ओर से बायोमैट्रिक उपलब्ध कराईं गईं हैं। इसकी वजह से असली कार्ड धारक को ही सामग्री देने की तस्दीक हो जाती है। लेकिन तमाम दुकानदारों ने इस व्यवस्था का तोड़ निकाल लिया है।
क्षेत्रीय पूर्ति अधिकारी अजीत कुमार सिंह यादव ने बताया कि क्रास चैकिंग के दौरान पाया गया कि राजेंद्र नारायण शुक्ला ने ज्यादातर खाद्यान्न बायोमैट्रिक मशीन में थम्प इंम्प्रेशन लिए बिना वितरित दर्शाया था। नियमों के उल्लंघन का दोषी मानते हुए राजेंद्र नारायण शुक्ला की दुकान निलंबित करके पास के दुकानदार प्रधान सिंह के यहां अटैच कर दी गई।
इसी प्रकार की कमियां पाये जाने पर लच्छीराम की जमानत राशि को जब्त कर लिया गया। तीन कोटेदारों को नोटिस सौंपने की कार्रवाई की गई है।

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