उरई। शहीदे आजम भगत सिंह सुखदेव राजगुरु के शहादत के 88 वें वर्ष पर भारतीय जन नाट्य संघ इप्टा एवं प्रगतिशील लेखक संघ प्रलेस ने दयानंद वैदिक कॉलेज उरई के पुस्तकालय सभागार में सेमिनार का आयोजन किया जिसका विषय भगत सिंह के विचारों की वर्तमान में प्रासंगिकता रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत रंगकर्मी दीपेंद्र द्वारा गीत मेरा रंग दे बसंती चोला जिसे फांसी का फंदा पहनने से पहले भगत सिंह सुखदेव राजगुरु ने गाया था, से की गई।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता हिंदी विभाग लखनऊ विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर रविकांत चंदन ने अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि भगत सिंह नौजवानों में उत्साह और देशभक्ति का प्रतीक है। वर्तमान में भगत सिंह के विचारों पर हमले हो रहे हैं। समाज के विघटनकारी तत्व उन्हें अपनी विचारधारा में शामिल करके उनकी सोच उनकी तार्किकता समाजवादी चिंतन न्याय और समानता पर आधारित लोकतांत्रिक समाज की विचार प्रक्रिया को खत्म करने की साजिश रच रहे हैं। अब उन्हीं ताकतों द्वारा कहा जा रहा है कि भगत सिंह तुम्हारी शहादत पसंद लेकिन विचारधारा नहीं। लेकिन भगत सिंह के विचारों की प्रासंगिकता यह है कि वह नौजवानों को लगातार राजनैतिक रूप से सक्रिय हस्तक्षेप करने का आह्वान कर रहे हैं उन्होंने अछूतों की समस्याओं को लेकर किसानों और मजदूरों की महिलाओं नौजवानों की समस्याओं को अपने विचारों में जगह दी जो आज भी प्रासंगिक है।
कार्यक्रम के संयोजक पत्रकार चिंतक केपी सिंह ने बताया कि भगत सिंह के विचारों से अंग्रेजी हुकूमत डर गई थी उन्हें एक दिन पहले फांसी दे दी गई। वर्तमान समाज पाखंड अंधविश्वास रूढ़िवादिता में फस चुका है नौजवान भटक रहा है आज महिलाओं किसानों मजदूरों नौजवानों को वैज्ञानिक विचारधारा की जरूरत है। विचारधाराएं देसी विदेशी नहीं होती हैं। बुद्ध, गांधी सारी दुनिया के लिए प्रासंगिक है। वहां के लोगों ने इन्हें विदेशी कहकर इन की मूर्तियों को नहीं तोड़ा हमें संकीर्णता से ऊपर उठकर सोचना चाहिए।
प्रलेस अध्यक्ष डा रामाधीन ने कहा कि भगत सिंह क्रांतिकारी ही नहीं वे स्वयं क्रांति का प्रतीक बन गए हैं।
इप्टा के संरक्षक डॉ सतीश चंद शर्मा की पुस्तक बेहतर दुनिया की तलाश का विमोचन डॉ रामशंकर द्विवेदी, रविकांत चंदन, सत्यवान धर्मेंद्र कुमार, केपी सिंह, रामाधीन, इतिहासकार डीके सिंह, राज पप्पन, देवेंद्र शुक्ला ने करते हुए कहा कि यह पुस्तक उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। डा रामशंकर द्विवेदी ने पुस्तक की समीक्षा की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता इतिहासकार डाक्टर देवेंद्र सिंह ने की भगत सिंह के विचारों की वर्तमान में प्रासंगिकता विषय पर विभिन्न वक्ताओं ने विचार प्रस्तुत किए जिनमें मुन्ना लाल नामदेव, रितेश कुमार, संतोष दीक्षित, अमजद आलम, सत्यवान, कृपाराम कृपालु, राजेंद्र सिंह जादौन थे।
इप्टा अध्यक्ष देवेंद्र शुक्ला ने सभी बुद्धिजीवियों संस्कृत प्रेमियों संस्कृति प्रेमियों नगर पालिका अध्यक्ष उरई अनिल बहुगुणा एवं देवी कालेज के प्राचार्य एवं पुस्तकालय के समस्त सहयोगियों का एवं सभी का अभिनंदन करते हुए आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में कैलाश पाठक, सुधीर अवस्थी, हरिशंकर याज्ञिक, लाल सिंह चैहान, डाक्टर अंकुर शुक्ला, यज्ञदत्त शर्मा, डा राजेश पालीवाल, पराग शर्मा, सुभाष चंद्र, रश्मि सिंह जादौन, धीरज दीक्षित, सुरेंद्र यादव, योगेश पाल, राजकुमार, का. हरिशंकर, गीता चैधरी, लक्ष्मीप्रसाद, अजय सिंह, मतलूब चंदेल, धर्मेंद्र कुमार, मनीष, राम रतन प्रजापति आदि उपस्थित थे।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए धर्मेंद्र कुमार ने सभी श्रोताओं और वक्ताओं को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया।

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