संभागीय नाट्य समारोह

 

गंगोह, सहारनपुर। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी द्वारा शोभित युनिवर्सिटी गंगोह व जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित संभागीय नाट्य समारोह में अनुकृति रंगमंडल कानपुर के कलाकारों ने नाटक ‘जांच पड़ताल’ का सफल मंचन किया।

नाटक के सह निर्देशक डा. ओमेन्द्र कुमार ने बताया कि निकोलई वैसिलीविच गोगोल के इस प्रसिद्ध नाटक दी गवर्नमेंट इंस्पेक्टर का संजय सहाय ने रुपांतरण किया है।

 

 

नाटक की कहानी कुछ यूं है कि एक छोटा शहर या फिर राज्य जहां सिर से नख तक हर सरकारी विभाग में भ्रष्टाचार व्याप्त है। वहां के मेयर गजेंद्र बाबू को एक दिन खबर मिलती है कि केंद्र ने राज्य की जांच पड़ताल के लिए उच्च अधिकारियों ने एक वरिष्ठ अधिकारी को नियुक्त किया है। मेयर साहब एक इंमरजेंसी मीटिंग में मजिस्ट्रेट संकटा प्रसाद सिविल सर्जन, डिस्ट्रिक स्कूल इंस्पेक्टर (डीआईओएस), पोस्टमास्टर और कोतवाल आदि सभी अफसर इस बिन बुलाई मुसीबत से निजात पाने के लिए उपाए खोजते है। संयोग से इसी दौरान एक होटल में दिल्ली से आए एक युवक को ये सभी दिल्ली वाला अफसर समझ लेते हैं।

मेयर साहब खुद और अपने अफसरान को बचाने की नियत से इस युवक कुमार को मेहमान बनाकर होटल से अपने घर ले जाते है। मेयर की दूसरी पत्नी इमरती देवी और पहली पत्नी की बेटी बेबी के बीच कुमार को पटाने की होड़ सी लगी है। एक दिन मौका देख अफसर के भ्रष्ठ आचरण से बुरी तरह परेशान व्यापारी कुमार से शिकायत करने पहुंच जाते हैं। बीच बीच में मेयर के मुंह लगे सेवक गोबर सिंह, झुलन, लोटा प्रसाद और चिलमची मियां अनायास ही हास परिहास के नए मौके दर्शकों के समक्ष परोसते हैं।

 

मेयर, उनके अफसरों और व्यापारियों से लंबी रकम वसूल कर कुमार रफूचक्कर हो जाता है। तब कहीं जाकर यह राज खुलता है कि वह जांच अधिकारी नहीं एक साधारण युवक था। तभी सर्किट हाउस का चपरासी मेयर साहब के बंगले पहुंच कर बताता है कि केंद्र से भेजा गया सचमुच का जांच अधिकारी पहुंच चुका है।

 

नाटक में गजेंद्र बाबू मेयर की भूमिका महेन्द्र धुरिया, स्कूल इंस्पेक्टर सुरेश श्रीवास्तव, मैजिस्ट्रेट राजीव तिवारी, सिविल सर्जन अनिल निगम, पोस्टमास्टर मनोहर सुखेजा, लोटा प्रसाद अनिल गौड़, चिलमची मियां राघुवेन्द्र प्रजापति, गोबर सिंह व चपरासी संजय शर्मा, बेबी  दीपिका सिंह, कुमार विजयभान सिंह, इमरती देवी की भूमिका शुभी मेहरोत्रा ने बखूबी निभायी। व्यापारियों की भूमिका में महेश चंद, प्रमोद शर्मा, कमल गौतम व अन्य किरदारों में विजय कुमार भास्कर, आकाश का अभिनय बेहतर रहा।

डा. ओमेन्द्र कुमार के संगीत व कृष्णा सक्सेना के निर्देशन ने युनिवर्सिटी के प्रेक्षागृह में मौजूद कला प्रेमियों को बांधे रखा।

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