उरई। उच्चतम न्यायालय द्वारा अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के दुरुपयोग को रोकने के नाम पर हालिया दिये गये फैसले के देश व्यापी विरोध के क्रम में सोमवार को विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनैतिक दलों के प्रदर्शन के कारण दिन भर गहमा-गहमी और तनाव के हालात रहे। पुलिस मुख्यालय और रेंज डीआईजी के यहां से पुलिस अधीक्षक से लगातार स्थिति की जानकारी ली जाती रही। कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पूरे शहर में सुरक्षा का भारी बंदोबस्त किया गया था।
मुख्य प्रदर्शन अवध काम्पलेक्स से शुरू हुआ जिसमें अनुसूचित जाति, जनजाति कर्मचारियों के संगठनों ने भी भागीदारी की। यह प्रदर्शन मुख्य सड़कों से गुजरता हुआ जब कलेक्ट्रेट पहुंचा तो भीड़ द्वारा भीतर प्रवेश का प्रयास करने के कारण पुलिस और प्रदर्शनकारियों में जमकर झड़पें हुईं।
इस दौरान कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग की ओर से राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया। जिसमें आरोप लगाया गया कि दलित उत्पीड़न निवारण एक्ट का दुरुपयोग होने की बजाय अधिकारियों द्वारा इसकी विवेचना में लापरवाही की जाती है जिससे पीड़ितों को न्याय नही मिल पाता। इसलिए दलित उत्पीड़न के मामलों में अनिवार्य रूप से सजा दिलाने के लिए पुलिस अधिकारियों के पेंच कसे जायें। पूर्व सांसद बृजलाल खाबरी, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष श्यामसुंदर चैधरी, भगवान दास खटीक, अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष संतराम नीलांचल, रेहान सिददीकी, अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष भग्गूलाल बाल्मीकि, उपाध्यक्ष आलोक दोहरे आदि शामिल थे।
उधर नौजवान भारत सभा के तत्वावधान में बघौरा से आक्रोश मार्च निकाला गया जो जिला परिषद होते हुए डीएम कार्यालय पहुंचा। लक्ष्मी और बृजेश ने इसमें क्रांतिकारी गीत सुनाये। यशवंत, बृजेश, आभा, दिनेश, विजय, अनुष्का, अमित, पकंज, शैलेंद्र, किशुन कुमार, हंसराज आदि भी शामिल रहे।
भाकपा माले के तत्वावधान में भीमाकोरे गांव, सहारनपुर, नागौर और ऊना में दलितों के साथ हिंसा की घटनाएं व बाबा साहब अंबेडकर, पेरियर रामस्वामी नायकर आदि महापुरुषों की प्रतिमाएं तोड़े जाने पर कलेक्ट्रेट में लाल झंडों के साथ विरोध प्रदर्शन किया गया। का. राजीव कुशवाहा, रामसिंह चैधरी, का. हरीशंकर, आशाराम, कांशीराम आदि के नेतृत्व में नगर की सड़कों पर प्रतिरोध मार्च निकाला गया। प्रदर्शन में प्रमुख रूप से लखनलाल मास्टर, राजकुमार, भारतीय एकलव्य लोक कला मंच के राष्ट्रीय संस्थापक लाखन सिंह निषाद, मुन्ना, चेतराम, भोला शंकर, रामप्रकाश, ज्ञानसिंह, हरीबाबू, कल्लू, रामा, आनंद कुमारी, पूजा, शकुंतला, रामसेवक चैधरी, रविकुमार, चरन सिंह आदि शामिल रहे। पार्टी ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
संत गाडगे श्रीवास समाज सेवा समिति के अध्यक्ष अजय प्रकाश के नेतृत्व में उच्चतम न्यायालय के फैसले को वापस कराने की मांग की गई।
सयुक्त बहुजन संघर्ष मोर्चा के जिला संयोजक टीआर मौर्या और संयोजक प्रदीप कुमार गौतम ने भी प्रदर्शन निकाला इसे एससी, एसटी बेसिक शिक्षा संघ के प्रदेश प्रवक्ता सुंदर सिंह शास्त्री ने संबोधित किया। इस अवसर पर विजय चैधरी, हीरालाल चैधरी, श्रीपाल, घनश्याम अनुरागी, मूलशरण कुशवाहा, कमल दोहरे, जगजीवन अहिरवार, बृजेश जाटव, आत्माराम फौजी, संजय गौतम, कैलाश राजपूत, बृजेश दददा, देवेंद्र कुमार, वीरेंद्र बौद्ध आदि शामिल थे।
अनुसूचित और अन्य पिछड़ा वर्ग के अधिवक्ताओं ने भी उच्चतम न्यायालय के फैसले पर विरोध जताया। इसमें दयाराम अहिरवार, महेश कुमार रंजन, संघ मित्र गौतम, सुरेश कुमार गौतम, कल्पना कुशवाहा, राकेश चंद्र, कैलाश कुमार, मनोज कुमार चैधरी, पूर्व बार संघ अध्यक्ष संतराम, राजा सिंह यादव आदि शामिल थे।







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