उरई| जेल के सामने रहने वाले लेखपाल संघ के पूर्व जिलाध्यक्ष कैलाश यादव की उनके  ही  पुत्र श्याम जी यादव ने गोली मार  कर हत्या कर दी। परिजनों के मुताबिक श्यामजी यादव ने  उन पर एक के बाद एक तीन फायर किये जिससे कैलाश यादब जमींन पर गिरकर ढेर हो गए । उनको परिजनों ने गोली की आवाज सुनकर मौके पर दौड़े तो देखा उनका शव खून से लथपथ पड़ा हुआ था। परिजनों ने तुरंत 100 हंड्रेड कोसूचना दी। इसके बाद सी ओ संतोष कुमार कोतवाली पुलिस के साथ  मौके पर पहुचे । फॉरेंसिक टीम को भी मौके के सुबूत सहेजने के लिए बुलाया गया । अजीब संयोग है कि मृतक कैलाश यादव भी अपनी पिता की हत्या में आरोपित रहे थे । उनकी जिस रायफल को पिता की हत्या में इस्तेमाल किया गया था उसी राइफल की गोलियों से ही उन्हें जान गवानी पड़ी ।

 

 

 

बाद में अपर पुलिस अधीक्षक सुरेन्द्र नाथ तिवारी ने भी मौके पर पहुँच कर मृतक के  बड़े लड़के रामजी यादव से घटना की जानकारी ली तो उसके बताये अनुसार श्यामजी की संगति ठीक नहीं थी जसके कारण वह पिता से रोजाना पैसे के लिए झगड़ा करता था ।

 

श्यामजी को  रईसी  शौक ने बना दिया पिता का हत्यारा

बताया जा रहा है कि  गलत संगति में पड़ने से श्यामजी उर्फ़ एस एस जेल के शौक इतने बढ़ गए थे कि वो आये दिन माता पिता से झगड़ा करने लगा था। दोस्तों के साथ घूमना फिरना मस्ती करना ,   कभी बाइक की मांग , कभी सोने की जंजीर तो कभी घर के लाइसेंसी असलहे लेकर घूमना। रोज कोई न कोई विवाद होता था ।  साथियों से मारपीट की कई घटनाओ में उसके लिए आम हो गयीं थीं जिससे घर वाले परेशान थे ।

 

जिस माँ ने अपनी बचत की रकम से खरीदवाई बाइक उजाड़ दिया उसी की मांग का सिंदूर

बताया जा रहा है कि  श्यामजी की माँ ने घर खर्च व फसल से कुछ पैसे बचा के रखे  थे उन्ही पैसे से उन्हीने श्यामजी यादव को उसकी जिद पर  अपाचे बाइक खरीदवाई । जिसकी जानकारी पिता को हुई तो उन्होंने श्यामजी से पूंछा  कि बाइक खरीदने के लिए  पैसे कहा से आये तो कहासुनी हो गई ।  मामला इतना बढ़ा कि पुत्र ने पिता का सीना  गोलियों से छलनी कर दिया।

 

कैलाश यादव् सेवड़ी ग्राम के रहने वाले थे लेकिन अपने पिता की हत्या के बाद उरई रहने लगे थे । उनकी तैनाती बरसार गाँव में थी । घटना के बाद कैलाश के घर में रोना पीटना मचा है जबकि आरोपी श्याम जी मौके से फरार हो चुका है । उसकी गिरफ़्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें गठित की गयीं हैं ।

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