0 जुल्मी व अत्याचारी सरकार को 2019 के चुनाव में उखाड़ फेंके
0 अछूतों को शिक्षा से बंचित कर जातियों के नाम पर कमजोर किया- गवई
0 दस दिवसीय बौद्धाचार्य प्रशिक्षण का समापन
उरई। दलितों, बौद्धों एवं पिछड़ों को धर्म के नाम पर जातियों में बांटकर हजारों साल तक उन पर अत्याचार किये गए। लेकिन तथागत बुद्ध के धम्म तथा बाबा साहब डा. भीमराव अंबेडकर के धम्म कारवां ने उन्हें इंसान बनाने का काम किया। जिस तरह से दो अप्रैल को पूरे देश भर में दलितों के दुख एवं गमों का गुबार सड़कों पर सामने आया ठीक उसी तरह वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में जुल्मी सरकार को उखाड़ फेंकना होगा। यह आवाहन बोधिसत्व बाबा साहब डा. भीमराव अंबेडकर के द्वारा स्थापित भारतीय बौद्ध महासभा के तत्वावधान में आयोजित दस दिवसीय बौद्धाचार्य प्रशिक्षण को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए बाबा साहब डा. भीमराव अंबेडकर के पौत्र भीमराव यशवंतराव अंबेडकर ने किया।
उन्होंने कहा कि जो दो अप्रैल को भारत बंद का आवाहन हुआ वह किसी नेता या राजनैतिक दल का नही था। बल्कि वर्तमान सरकार के द्वारा दलितों पर की जा रही जुल्मज्यादती के खिलाफ था। क्योंकि सरकार ने दलित, पिछड़ों का जिस तरह से दमन किया है उनकी शिक्षा को बाधित करने के लिए बजीफा नही दिया। दलित वर्ग के सरकारी कर्मचारियों एवं अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के जरिये डिमोलाइज किया यह ऐसे तमाम सारे कारण है जिसके कारण दलितों को पूरे देश भर में प्रदर्शन के लिए मजबूर होना पड़ा मन में जो दुख व पीड़ा था वह सड़कों पर आ गई। उन्होंने कहा कि ठीक इसी तरह 2019 के चुनाव में इस जुल्मी सरकार को उखाड़ फेंकना है। उन्होंने बुंदेलखंड क्षेत्र से बौद्ध धर्म के गहरे रिस्ते की ओर इशारा करते हुए कहा कि इसकी जांच होना चाहिए। क्योंकि बाबा साहब के कारवां को आगे बढ़ाने के लिए जिस तरह से मान्यवर कांशीराम ने बुंदेलखंड से दलितों, पिछड़ों के हक एवं अधिकार की लड़ाई लड़ी थी और उन्हें सत्ता तक पहुंचाया। हमें धम्म के इस कारवां को पूरे उत्तर प्रदेश में बढ़ाना होगा। बौद्ध महासभा बौद्धों का संगठन है इसे मजबूत करना होगा। क्योेंकि राजनीति क्षणभंगुर है वह आती जाती रहती है लेकिन धम्म के इस कारवां को आगे लेकर जाना है। उन्होंने कहा कि 12 सौ साल तक का इतिहास हमें पढ़ाया जाता है लेकिन इसके पहले जो बौद्ध धर्म भारत से लेकर पूरे एशिया महाद्वीप तक फैला हुआ था वह कैसे लिप्त हो गया। हमें अपने आचरण को दुरूस्त कर अपने इतिहास को पढ़ना होगा। हमें यह नही कहते है कि सभी लोग बौद्ध भिक्क्षु बन जाए। लेकिन हमें धम्म को आगे बढ़ाने में पूरी तरह से समर्पित होना पड़ेगा। जो गलती इतिहास से हो गई है उसे सुधार कर फिर से बौद्ध धर्म के सुनहरे कल को वापस लाना होगा। आज फिर से सम्राट अशोक के इतिहास को पढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि जल्द की सम्राट अशोक पर मराठी में पुस्तक आ रही है जिससे सारी सच्चाई सामने आ जाएगी। बौद्ध धर्म का गौरबशाली इतिहास सामने लाने में बौद्ध महासभा कोई कसर नही छोड़ेगी। इसके पूर्व विशिष्ट अतिथि एवं बौद्ध महासभा के जगदीश सिंह गवई ने इस बात पर दुख व्यक्त किया कि लोग बौद्ध धर्म की बात तो करते है लेकिन घर में अभी भी देवी देतावाओं की पूजा करते है। उन्होंने बाबा साहब द्वारा बताई गई 108 तरह की तृष्णाओं से मुक्ति पाकर फिर से बौद्ध धर्म के कारवां को आगे बढ़ाने की बात कही। उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार केपी सिंह के तथागत बौद्ध के धम्म तथा बाबा साहब डा. भीमराव अंबेडकर के संघर्ष पर अध्ययन की सराहना करते हुए कहा कि हमस ब दलित पिछड़े बौद्ध व जैन मूलनिवासी है। जैन धर्म भारत में बौद्ध धर्म से 55 साल पहले आया लेकिन बौद्ध धर्म ने जिस तरह से पूरे भारत वर्ष में अपना स्थान बनाया है वह मूलनिवासियों की वजह से। उन्होंने कहा कि हम लोग बाहर से नही आये बल्कि जो लोग जनेऊ व गाय को साथ लेकर आये वहीं बाहर से आये हुए है। जिन्होंने यहां के मूलनिवासियों को हजारों सालों तक गुलाम बनाकर रखा और शिक्षा के से बंचित कर धर्म के नाम पर जातियों में बांटकर हमें पशुओं जैसा जीवन जीने को मजबूर किया है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब के संविधान एवं उनके संघर्ष से कारण आज हम इंसान बनकर जी रहे है फिर भी संविधान को कमजोर करने का काम किया जा रहा है। समारोह को बौद्ध महासभा के केन्द्रीय संगठक केपी सिंह हितैशी, राजबीर सिंह बौद्ध, राजबीर सिंह सिद्धार्थ प्रभारी शिविर प्रशिक्षण, ब्रजेश कुमार बौद्ध ने भी संबोधित किया।
10 दिवसीय प्रशिक्षण प्रशिक्षण शिविर में सदाचार का प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले बौद्ध भिक्षुओं को सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया कार्यक्रम का शुभारंभ बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के चित्र पर यशवंत राव अंबेडकर तथा अन्य अतिथियों ने पुष्पांजलि अर्पित कर किया समारोह में सभी अतिथियों का स्वागत सत्कार किया गया। भीमराव यशवंत राव अंबेडकर का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया माता प्रसाद ने संघ नायक भंदतशील प्रकाश महाथेरा, का पुष्प अर्पित कर सम्मान किया। इसके अलावा किरण चैधरी, राजरानी उर्फ राजो के द्वारा भी बौद्ध भिक्षुओं का सम्मान किया गया। प्रशिक्षण में प्रथम द्वितीय एवं तृतीय रहे बौद्ध आचार्यों ने प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञानार्जन की जानकारी देते हुए भविष्य में अपना पूरा जीवन धम्म के लिए समर्पित करने का संकल्प व्यक्त किया। वीरेंद्र प्रताप सिंह जाटव जो कि अब भंते महाकश्यप कहलाएंगे का कहना था कि उन्होंने प्रशिक्षण में धम्म से बहुत कुछ सीखा है इस दौरान उनकी दिनचर्या ही बदल गई। तो तीसरे स्थान पर रहे भंते सुबोध ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने बहुत कुछ सीखा वह है सुबह 4 बजे जाग जाते थे। उसके बाद धम्म वंदना मंगल करण आदि तमाम चीजें उन्हें बताई गई वह जब भी भोजन दान करने जाते थे तो बुद्धम शरणम गच्छामि धम्मं शरणं गच्छामि संघम शरणम गच्छामि मध्यम स्वर में उच्चारण करते हुए भोजन दान कर्ता के यहां पहुंचते थे उन्होंने प्रशिक्षकों एवं महाथेरा का भी धन्यवाद व्यक्त किया। जयसिंह सुमन जो कि भंते महानाम के नाम से जाने जाएंगे का कहना था कि जनपद जालौन की धरती का सौभाग्य है कि आज यहां बोधिसत्व बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के पौत्र भीमराव यशवंत राव अंबेडकर का आगमन हुआ है यहां की धरती धन हो गई है 30 मार्च से शुरू हुआ प्रशिक्षण शिविर आज समापन हो रहा है। शिविर के प्रभारी राजवीर सिंह सिद्धार्थ ने बताया कि संस्था के द्वारा 24 प्रकार के शिविर लगाए जाते हैं हम चाहते हैं कि महिलाओं का भी प्रशिक्षण होता लेकिन भविष्य में जनपद जालौन की धरती पर तीन प्रकार के शिविर लगाए जाएंगे लगाए जाएंगे जिसमें महिला एवं पुरुषों का प्रशिक्षण शिविर के साथ ही समता सैनिक दल का युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा जो कि धम्म की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहेंगे। उन्होंने कहाकि जो लोग बाबा साहब के परिवार का सम्मान नहीं करते वह डॉक्टर अंबेडकर के अनुयाई नहीं हो सकते बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर ने हिंदू धम्म में विसंगतियों को देखते हुए कहा था कि उनका जन्म हिंदू धम्म में हुआ यह उनके बस की बात नहीं थी लेकिन हिंदू धम्म में मरेंगे नहीं क्योंकि यह उनकी बस में है यही वजह रही कि उन्होंने हिंदू धर्म को मलमूत्र तरह त्याग कर बौद्ध धम्मधारण किया था। उन्होंने कहा कि शिविर में युवाओं एवं महिलाओं की कमी रही हमारा किसी भी संस्था से कोई विरोध नहीं है हमें हिंदू धर्म से सीखना चाहिए कितने सारे संगठन हैं लेकिन सब एक हो जाते हैं इसी तरह हमें धम्म की रक्षा के लिए एक होकर धम्म को आगे बढ़ाना होगा पूर्व मंत्री चैनसुख भारती ने कहा कि बौद्ध धम्म वैज्ञानिक धम्म है इसके आधार पर चलकर समाज का कल्याण हो सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अपने को बाबा साहब का अनुयाई कहते हैं और बाबा साहब के हिसाब से उनकी सरकार काम कर रही है लेकिन हिंदू समाज में मौजूद विघटनकारी नीतियों को खत्म करने का काम नहीं कर पा रहे हैं। समारोह को वरिष्ठ पत्रकार केपी सिंह, अंबेडकर यूनीवर्सिटी लखनऊ केे प्रोफेसर रिपुसूदन सिंह ने भी संबोधित किया। अध्यक्षता बाबूरामाधीन एवं संचालन राकेश भारती ने किया। कार्यक्रम में माता प्रसाद प्रजापति, अखिलेश भारती, नाथूराम कुशवाहा, जितेन्द्र दोहरे, रामसनेही जाटव, आरएन गौतम, महेश चंद्र शिरोमणि, रामसिंह आजाद, रामअवतार मास्टर आदि ने अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया।

One response to “दलितों पिछड़ों के विकास को अबरूद्ध कर रही सरकार -बोले बाबा साहेब के पौत्र भीमराव ”

  1. Rahul Singh Bauddha Avatar

    नमो बुध्दाय भाई

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