* मामला नदीगांव रोड के एक घर में मिलीं दंपत्ति की सड़ी गली लाशों का
कोंच-उरई । विगत दिनों कस्बे के बाहरी इलाके नया पटेल नगर के नदीगांव रोड पर एक घर में मिलीं दंपत्ति की सड़ी गली लाशों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने कोतवाली पुलिस को चकरघिन्नी बना कर रख दिया है। पुलिस इस बात को लेकर हलकान है कि क्या ये बाकई दोहरी हत्या है या फिर शुरू में वह जिस थीम पर आगे बढ रही थी जिसमें पत्नी की हत्या कर पति का फांसी पर लटकना माना जा रहा था। परिस्थितियां जिस तरह की बनी हैं उनमें पुलिस हत्या की थीम की कडिय़ां नहीं जोड़ पा रही है क्योंकि जिनकी हत्या की कहानी (पीएम रिपोर्ट के मुताबिक) कही जा रही है वे एकाकी जीवन जीने बाले थे और सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न हत्या का मोटिव पुलिस नहीं ढूंढ पा रही है।
गौरतलब है कि बीती 23 अप्रैल सोमवार को नदीगांव रोड पर नया पटेल नगर इलाके के एक घर में दंपत्ति कमलेश कुशवाहा और उसकी पत्नी कैलाशी की सड़ी गली लाशें बरामद हुई थीं। कैलाशी की लाश आंगन में चारपाई पर पायी गई थी जबकि कमलेश आंगन में लगे जाल से रस्सी के सहारे लटका पाया गया था। पहली नजर में मौतों का कारण गृह कलह के चलते पति द्वारा पत्नी की हत्या कर खुद फांसी पर लटक कर जान देना मान कर पुलिस आगे बढ रही थी लेकिन दोनों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्टों ने मामले को ऐसा उलझाया कि इसका रुख ही पलट गया। पीएम रिपोर्टों ने एक की गला दबा कर और दूसरे की दम घुटने से मौत की बात कह कर इसे दोहरा हत्याकांड बना दिया जिसके चलते पुलिस को उक्त प्रकरण हत्या की धाराओं में दर्ज करने के लिये मजबूर होना पड़ा। लाशें मिलने के सप्ताह भर बाद भी पुलिस के हाथ बिल्कुल खाली हैं। हत्या जैसी परिस्थितियां नहीं होने के कारण पुलिस को कोई साक्ष्य भी ऐसा नहीं मिल पा रहा है जिसे पकड़ कर वह घटना की तह में जा सके। बड़ा सवाल यहां यह है कि चूंकि लाशें काफी पुरानी तकरीबन हफ्ते भर पुरानी होने के कारण बुरी तरह सड़ गल गईं थीं जिसके चलते पंचायतनामा के वक्त भी पुलिस को शवों के शरीर पर किसी तरह के निशानात नहीं मिले थे। पीएम रिपोर्टों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों में तालमेल नहीं होने के कारण यह मामला पुलिस के गले की फांस बनता जा रहा है। इस मामले में पुलिस बिशेषज्ञों की राय लेने का भी मन बना सकती है।







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