उरई। 10 दिन से कलेक्ट्रेट में डूडा के बाबू के भ्रष्टाचार के खिलाफ धरना दे रहे परिवार की फरियाद की अनसुनी कर अधिकारी संवेदनहीनता की पराकाष्ठा जता रहे हैं।
पूनम पत्नी दयाराम लहरियापुरवा में डूडा द्वारा बनवाई गई गरीब कालोनी में ब्लाक संख्या 23/267 में आठ माह पहले रहने लगी थी। जिसमें खिड़की, दरवाजे व बिजली की फिटिंग नही थी। डूडा के स्टाफ ने आश्वासन दिया था कि इसमें काम करवा लो। नीचे के फ्लोर पर बने इस फ्लेट को बाद में उसके नाम से आवंटित कर दिया जायेगा।
पूनम ने इस आशा में लगभग 40 हजार रुपये फ्लेट को व्यवस्थित करने के लिए खर्च कर दिये। इस बीच डूडा आफिस के बाबू अरुण कुमार श्रीवास्तव ने उनसे पांच हजार रुपये सुविधा शुल्क मांगा। पीड़ित महिला की बच्ची की किडनी खराब है। जिसके इलाज में उसे भारी खर्चा करना पड़ रहा था। उसने इसलिए बच्ची की दुहाई देते हुए पांच हजार रुपये देने में असमर्थता व्यक्त की जिस पर बाबू अरुण कुमार श्रीवास्तव ने उसे धमकी दी कि तुम्हारा फ्लैट बदलकर तुम्हें ऊपर वाले फ्लोर पर पहुंचा दिया जायेगा। जब महिला ने इसकी शिकायत डीएम से की तो बाबू ने चिढ़कर उसकी घर गृहस्थी का सामान जिस फ्लैट में वह रह रही थी उसमें से निकलवाकर फिकवा दिया।
बाद में महिला से बीच के फ्लोर में आवास देने की पेशकश की गई। महिला ने इसकी शिकायत सांसद से की तो उन्होंने उसकी बच्ची की गंभीर हालत देखते हुए नीचे के फ्लोर में ही कोई फ्लैट आवंटित करने के आदेश जारी कर दिये। इससे नाराज होकर महिला ने पूरे परिवार के साथ 10 दिन पहले कलेक्ट्रेट में धरना शुरू कर दिया। लेकन अधिकारी नही पसीज रहे। राष्ट्रीय विकलांग पार्टी भी धरने में महिला का समर्थन कर रही है।







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