कालपी-उरई। पिछले दिनों आये भारी तूफान से चरमाई विद्युत व्यवस्था तो 40 घंटे के अथक प्रयास के बाद पटरी पर आ गई लेकिन नागरिकों को इस दौरान पीने के पानी की बड़ी किल्लत का सामना करना पड़ा।
नगर में लगभग 70 फीसदी हैण्डपंप ठप्प हैं। जिन्हें ठीक कराने के लिए लोग न जाने कितनी बार गुहार लगा चुके। लेकिन संबंधित विभाग ने आज तक इनकी ओर नजरें इनायत नही की। सरकार ने तीन माह पहले ही पेयजल व्यवस्था को युद्ध स्तर पर सुदृढ़ करने के निर्देश जारी कर दिये थे लेकिन इसका भी असर नही हुआ। इसलिए बिजली गुल रहने के दौरान गगरी-बाल्टी लेकर हैंडपंपों पर पहुंचे जरूरतमंदों को भीषण स्थिति का सामना करना पड़ा।
वार्ड नं. 24 सदर बाजार में आधा दर्जन हैंडपंपों में से एक भी पानी नही दे रहा है। यही हालत अन्य वार्डों की है। वार्ड की परेशानियों के निराकरण और आवश्यकताओं को पूरा करने का जिम्मा सभासदों पर होता है। लेकिन दुर्भाग्य का विषय है कि इस बार 90 फीसदी सभासद ऐसे चुने गये हैं जो समाज सेवा के नाम पर जीरो और देखने भर में हीरो हैं। इन्हें केवल वाहनों में सभासद लिखाकर घूमने से मतलब है। जरूरत इस बात की है कि सभासदों को अपने उत्तरदायित्व के बारे में प्रशिक्षण दिया जाये।
वैसे अभी नगर पालिका परिषद ने विकास कार्यों का श्रीगणेश नही किया है। कारण जो भी हो। नगर में ढेरों समस्यायें हैं जिनमें से टरननगंज बाजार की सड़क, बस स्टैण्ड का आभाव, पेयजल आपूर्ति की छिन्न-भिन्न व्यवस्था, लड़खड़ाती विद्युत व्यवस्था और अतिक्रमण से सिसकता मुख्य बाजार आदि मुख्य हैं।
मायूसियों के बीच खुशगंवार तथ्य यह है कि नगर पालिकाध्यक्ष के प्रतिनिधि की कर्मठता और लगनशीलता का हर कोई कायल है। वे सबको साथ लेकर चलने वाले व्यक्ति हैं। इसलिए उम्मीद है कि अंत भला तो सब भला की तर्ज पर आखिरकार कालपी के बांशिदों को बदहाली के इस साये से निजात मिलेगी।

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