उरई। न्यायालयों में मुकदमों का बोझा कम करने के लिए मामलों को मध्यस्थता के माध्यम से निस्तारित करने की प्रक्रिया को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इस क्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अनिल कुमार यादव ने बताया कि उक्त जरूरत के तहत न्यायालय परिसर में पहले से मीडिएशन सेंटर कार्य कर रह है। इसमें आधा दर्जन मध्यस्थगण व जज नियुक्त हैं। दूसरी ओर दीवानी न्यायालय में परिवार परामर्श केंद्र संचालित है। जिसमें दो संधिकर्ता नियुक्त किये गये हैं। इसके साथ-साथ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में एक पूर्ण कालिक सचिव की नियुक्ति कर दी गई है।
उन्होंने कहा कि ऐसा विवाद या प्रकरण जो किसी न्यायालय में लंबित नही है और पक्षकार उसे समझौते के जरिये निपटाना चाहते हैं तो वे इसको मध्यस्थता केंद्र या परिवार परामर्श केंद्र में प्रस्तुत कर सकते हैं। प्री-लिटिगेशन स्कीम के अंतर्गत मध्यस्थता के माध्यम से मामलों के निस्तारण से वादकारियों को अनावश्यक खर्च भागदौड़ और समय की बर्बादी से राहत मिलती है। सचिव अनिल कुमार यादव ने बताया कि सभी सिविल, दाण्डिक न्यायालयों और राजस्व, स्टाम्प व चकबंदी न्यायालयों से कहा गया है कि वे अपने यहां के सुलह योग्य मामले मध्यस्थता केंद्र को संदर्भित कर दें।



Leave a comment