कालपी-उरई । हिंदू सनातन धर्म का विशाल धर्मस्थल लक्ष्मी नारायण बड़ा स्थान कालपी की महामंडेलश्वर की गद्दीनशीन को लेकर संत समाज धार्मिक रीति रिवाज तथा सनातन परंपराओं के अनुरूप निर्णय ले चुका है। 18 मई को विशाल भंडारा कार्यक्रम के अवसर पर महामंडलेश्वर तथा अन्य जिम्मेदार पदाधिकारियों कि सार्वजनिक घोषणा करेगा। इसमें किसी भी बाहरी व्यक्ति का कोई भी हस्तक्षेप नहीं रहेगा। संतो के अनुसार मंदिर से जुड़े सभी एवं शिष्य सनातन परंपराओं का निर्वाह करेंगे।
उल्लेखनीय हो कि 11 सौ वर्ष प्राचीन लक्ष्मी नरायण बड़ा स्थान मंदिर कालपी के यमुना नदी के तट मे स्थित है।मंदिर के भक्तों तथा शिष्यों ने समय समय पर मंदिर के हक मे अपनी अपनी भूमि दानस्वरूप दी है।बाबा रामकरण दास एवं महंतों ने पत्रकारो को अवगत करते हुये बताया कि मंदिर के सारे फैसले संतो के द्वारा ही तय किये जाते हैं।प्राचीन तथा सनातन परम्पराओं के मुताबिक महामंडलेश्वर की गद्दीनशीन का निर्णय भी संत समाज ले चुका है।उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुये बताया कि व्रहम्लीन महामंडलेश्वर की एक वर्ष की बीमारी की अवधि के दौरान अस्पताल मे सेवा करना तो दूर कई ऐसे लोग देखने तक नहीं पहुंचे।महामंडलेश्वर के व्रहम्लीन होने के बाद अब मंदिर का सर्वे सर्वा बनने का सपना देख रहे हैं।एक महिला ने तो मंदिर की जमीन तक बेचने का कृत्य किया।मंहामडलेश्वर के एक वर्ष के दौरान कई लोगों ने अर्थव्यवस्था को चैपट करके खोखला कर दिया।मंदिर मे मौजूद धर्माचार्यो ने कहा कि महामंडलेश्वर के मामले मे संत समाज का निर्णय ही सर्वमान्य होगा।बाहरी लोगों का इस मामले मे दखल बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।







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