रोहित राठौर द्वारा
उरई। प्रदेश की सरकार लोगों की सेहत के लिए चाहे जितनी फिक्रमंद हो लेकिन जिले के सरकारी अस्पतालों की स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। कोंच तहसील के गांव चांदनी में बना सरकारी आयुर्वेदिक अस्पताल इसकी मिसाल है। इसमें तैनात डाक्टर जितेंद्र सिंह का निवास झांसी में है और वे वहीं परमानेंट रहते हैं। उनका चांदनी के अस्पताल में आना मेहमान की तरह कभी-कभार ही होता है।
अस्पताल में तैनात वार्ड ब्वाय रघुनंदन की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। ग्रामीणों ने बताया कि डाक्टर और वार्ड ब्वाय के इस रवैये की वजह से अस्पताल अधिकांशतः बंद रहता है। जिससे दूर-दराज से आने वाले मरीजों को बैरंग लौट जाना पड़ता है।
गुरुवार को मीडिया की टीम जब अस्पताल पहुंची तो सुबह 10 बजे तक भी डाक्टर साहब का अता-पता नही था जबकि ग्रीष्मकाल में सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक अस्पताल खोलने के आदेश हैं। बाद में डाक्टर साहब के दर्शन मीडिया टीम को हो गये। लेकिन वार्ड ब्वाय फिर भी नजर नही आया। जब उसकी उपस्थिति के बारे में मीडिया टीम ने जानना चाहा तो डाक्टर साहब ने हाजिरी रजिस्टर पर बिना उसके प्रार्थना पत्र के उसकी सीएल चढ़ा दी।







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