कोंच-उरई। जिले में शिक्षा व्यवस्था की नाकामी किसी से छुपी नही है। फिर भी न तो शासन इस ओर कोई ध्यान दे रहा है और न ही प्रशासन को इसकी चिंता हो रही हैं। जनपद के अधिकांश सरकारी विद्यालय बंद रहते हैं और अधिकारी अपना नजराना लेकर चैन की नींद सोते हैं।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों की आपराधिक धूर्तता से भरी उदासीनता का फायदा कर्तव्यहीन सरकारी अध्यापक उठा रहे हैं। जो विद्यालय से अंतध्र्यान रहकर शिक्षा व्यवस्था को अपनी हालत पर आंसू बहाने के लिए मजबूर करने में कसर नही छोड़ रहे हैं।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बेबसी तब देखने को मिली जब कोंच के खंड शिक्षाधिकारी अजीत यादव ने कुछ प्राथमिक विद्यालयों के बंद रहने पर उनसे जबाव तलब के लिए नोटिस भेजा लेकिन अध्यापकों ने उनके नोटिस को रददी के टुकड़े से ज्यादा तबज्जों नही दी और नही इसका कोई जबाव दिया। जाहिर है कि जब एक शिक्षक अपने अधिकारियों का अदब-लिहाज तक नही कर रहा तो वह बच्चों को स्कूल में पढ़ायेगा भी क्यों। इसी के चलते अधिकांश स्कूल बंद रहते हैं।
नये शिक्षा सत्र में जहां एक ओर सरकार ने हर विद्यालय में शत-प्रतिशत नामांकन का लक्ष्य रखा है। वहीं कामचोर अध्यापक उसकी इस कटिबद्धता पर पानी फेरने से बाज नही आ रहे। जब विद्यालय ही नही खुलता तो बच्चों का नामांकन कहां और कब हो यह जानने की फुर्सत किसी अधिकारी को नही है।

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