उरई। त्रेता युग के अहिल्या उद्धार का रूपक वर्तमान में भी चरितार्थ नजर आया। जालौन विकास खंड के छोटे से गांव गुलाबपुरा को आज तक जड़ता ने घेर रखा था। लेकिन सड़क बनने की मुंह मांगी मुराद पूरी होने के बाद यह गांव भी अब विकास की कुलाचें भरने को तैयार नजर आने लगा है।
जालौन-बंगरा रोड पर गुलाबपुरा गांव ब्लाक मुख्यालय जालौन से केवल 6 किलोमीटर की दूरी पर है। सड़क के नाम पर इस गांव में 35-40 साल पहले कच्चा रास्ता बनाया गया था। इसके बाद किसी ने इसकी सुध नही ली। इस गांव में समय जैसे ठहर गया था। सबसे बुरी दशा बरसात में होती थी जब गांव टापू बनकर अपने में कैद हो जाता था। बीमार हो जाने पर किसी को अस्पताल पहुंचाना भी संभव नही हो पाता था।
गांव की इस दशा के कारण यहां के नौजवान कुवांरे रह जाने को अभिशप्त हो गये थे। इस गांव के युवकों से दूसरे गांव के लोग अपनी लड़कियों की शादी करने को तैयार नही होते थे। गांव में 100 से भी कम वोट होने की वजह से यहां के लोगों के लिए नेताओं को दिमाग खपाना भी गंवारा नही था।
गांव वालों की खुशकिस्मती रही कि एक दिन क्षेत्र भ्रमण पर युवा जिला पंचायत सदस्य दीपराज गुर्जर गुलाबपुरा गांव पहुंच गये। उन्होंने जब गांव वालों की हूंक समझी तो जिला पंचायत निधि से सड़क बनवाने का वायदा उन्होंने मौके पर ही कर डाला और इसके बाद आनन-फानन उन्होंने मंजूरी कराकर यह सड़क बनवा भी डाली। उन्हीं के हाथों से अब इस सड़क का अनावरण हुआ है। पूरा गांव यह सड़क बनने से खुशी से झूम रहा है।




Leave a comment