
उरई । हल्की बारिश के नतीजे में पानी रिसाव के बाद इन दिनों गाँव में खपरा-छाऊनी का अभियान चल रहा है और बात हो रही है कालपी तहसील के गाँव बिनौरा वैद्य की जहाँ तकरीबन आधा सैकड़ा छप्परों पर दो सैकड़ा छाऊनदार अपना पसीना बहा रहे हैं । लेकिन देख कर हैरत होती है कि इन कामगारों में जवान एक भी नहीं है|सारे के सारे 50 से 85 साल के मेहनतकश अपनी जान खपरों की लौटा-पलटी में लगा रहे हैं|
नौजवान और मेहनत के काम तो करते हैं लेकिन चूकिं खपरों को रखने में सलीक़ा व दस्तकार समझ की दरकार है, इसलिए बारीकी वाले काम से वह दूर हैं|शुरू आषाढ़ से छाऊनी के काम में लगे 85 वर्षीय मुहब्बत शाह कहते है कि काम इतना अभी बाकी है कि छाऊनदारों की कमी में लोग तिरपालों से काम चला रहे हैं|अगर नौजवान इस काम बटायें तो हम लोगों को आराम रहे|तेज़ हवाओं ने किसी का बड़ेरा सरका दिया है तो किसी बड़ेरा तोड़ डाला है,ऐसे में अतिरिक्त मेहनत करके खम्बियों को न कसा जाए तो हादसे का अंदेशा रहता है|गाँवदारी में सब देखना पड़ता है|
65 वर्षीय रामनारायण जाटव कहते हैं कि नए लड़के खप्परों को सीधा रखना तक नहीं जानते और धमके से बिलबिला पड़ते हैं| 68 वर्षीय रेवा शंकर कहते हैं कि साल में कोई मौक़ा तो है जो हम लोगों का महत्व बढ़ाता है| इसलिए मेहनत करना खलता नहीं है|
बिनौरा वैद्य के छाऊनीदारों का दूर-दूर तक नाम है~मोहब्बत शाह,मंगल पाल,जगदीश प्रजापति,रामवीर कुशवाहा,मंगल शाह आदि के लिए दहगुवाँ,गड़ेना,ककहरा,ऐदलपुरा,पट्टी,बैन तक से छाऊनी का बुलावा आता है|दिल को सुकून देने वाली छाऊनी की ये कला लगता है कि इन महारथियों की अँगुलियों के थम जाने पर बस दास्तान बनके रह जाएगी|






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