उरई। सेवा निवृत्त इंस्पैक्टर के साथ हुई धोखाधड़ी के मामले में पुलिस की उदासीनता के कारण कोई कार्रवाई नही हो पा रही है। रिटायर इंस्पैक्टर ने पुलिस अधीक्षक से कार्रवाई के लिए हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है।
रामपुरा थाने के ऊमरी निवासी सुखवीर सिंह चैहान ने पुलिस विभाग में लंबे समय तक सेवा की और इंस्पैक्टर बनने के बाद वे रिटायर हो गये। सेवा निवृत्ति के बाद वे अपने गृह नगर ऊमरी में आकर रहने लगे। इस वर्ष मार्च के महीने में दो लोग मोटर साइकिल से उनके पास में आये और उनके मकान में एग्रो फर्टिलाइजर कंपनी का गोदाम खोलने का लालच उन्होंने दिया। उन्होंने मकान की मोबाइल से फोटो ली और बताया कि वे आपकी डिटेल अपने लखनऊ दफ्तर में भेज रहे हैं जहां से गोदाम के लिए मंजूरी होगी। एक अप्रैल को उनके पास में मोबाइल पर मैसेज आया जिसमें डीलर का कोड नंबर लिखा था। दो दिन बाद 3 अप्रैल को तीन लोग गाड़ी से आये और उन्होंने नक्शा बनाया। उन्होंने औपचारिकता की पूर्ति के लिए उनसे दो चैक एक चार हजार रुपये और एक सात हजार रुपये का मांगा। कहा कि यह सभी पैसा आपको वापस मिल जायेगा और आपके गोदाम का किराया शुरू हो जायेगा। विश्वास में आकर रिटायर इंस्पैक्टर ने दो चैक उन्हें अपने हस्ताक्षर करके सौंप दिये। जिसमें सिर्फ अंकों में रकम उन्होंने भरी बाकी दोनों चैके खाली थीं। 6 अप्रैल को एक मैसेज उनके मोबाइल पर आया जिससे उन्हें पता चला कि उनके द्वारा दी गई चैकों पर स्टेट बैंक की कन्नौज शाखा से क्रमशः 49 हजार रुपये और सत्तर हजार रूपये कैश निकाल लिया गया है। धोखाधड़ी का आभास होने पर उनके हाथ-पैर फूल गये। उन्होंने रामपुरा थाने में मुकदमा दर्ज कराने का प्रयास किया। लेकिन थाना स्तर पर परिचय देने के बावजूद उनकी नही सुनी गई। बाद में जब वे एसपी से मिले तब 16 अप्रैल का उनकी रिपोर्ट दर्ज हुई।
सुखवीर सिंह चैहान का कहना है कि अभी तक थाना पुलिस ने इस मामले में जांच में कोई प्रगति नही की है। इसलिए उन्होंने पुलिस अधीक्षक से फिर हस्तक्षेप की गुहार लगाई। उनका कहना है कि मामला साइबर सैल को सौंपा जाये तो संभव है कि जालसाज को पकड़ा जा सके।

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