इटावा। चंबल की विरासत को समेटे अपने ढंग के पहले संग्रहालय का उद्घाटन हो गया। ये पहला मौका है जब चम्बल के नाम से इस तरह की शुरुआत की गई है। इटावा के चाणक्य होटल में हुए समारोह में कई प्रदेशों से जुटे लोगों ने उद्घाटन समारोह में हिस्सा लिया। इस संग्रहालय का मकसद चम्बल की उस पहचान को हटाना है, जो नकारात्मक तौर पर बन चुकी है। संग्रहालय से चम्बल के क्रांतिकारी इतिहास से लोगों को साझा होने का मौका मिलेगा। संग्रहालय में हजारों दुर्लभ किताबें हैं। संग्रहालय इटावा शहर के चैगुर्जी में स्थापित किया गया है।
चंबल संग्रहालय में 17वीं शताब्दी से लेकर अब तक करीब 20 हजार पुस्तकें-पत्रिकाएं सैकड़ो दुर्लभ दस्तावेज हैं। विभिन्न रियासतों से लेकर विदेशों तक के चालीस हजार डाक टिकट, चार हजार हाथ से लिखे पत्रों के साथ ही प्राचीन पेंटिंग-तस्वीरें, प्राचीन मानचित्रों के इलावा राजा भोज के दौर से लेकर अलग-अलग काल के करीब तीन हजार प्राचीन सिक्के, सैकड़ों ग्रामोफोन रिकार्ड, सैकड़ों दस्तावेजी फिल्में आदि सामग्री उपलब्ध है।

गांधी के इटावा कनेक्शन का मंचन विदेशों में
उदघाटन समारोह में विश्वविख्यात नाट्य निर्देशक प्रणव मुखर्जी ने अपने एकल अभिनय ‘स्वराज’ के जरिये सीधा संवाद करते हुए मध्यवर्गीय समाज की चुप्पी पर करारा चोट किया। वे अपने पच्चीस मिनट के एकल अभिनय के दौरान बाडी मूवमेंट के अलावा सुलगते सवालों पर वीडियो फुटेज भी दिखा रहे थे जिससे बार-बार सभागार में सन्नाटा पसर जाता था। नाट्य मंचन के बाद रुबरु प्रणब मुखर्जी ने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के बहाने उन उसूलो पर चर्चा करते हुए इटावा के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी छक्कीलाल यादव की हस्तलिखित डायरी का जिक्र किया। डायरी के पन्नों के आधार पर वे गांधी के इटावा कनेकशन पर इसी हफ्ते वर्धा और साउथ अफ्रीका में मंचन करेंगे।

बिखरा ज्ञान सहेजा
समारोह के दौरान इंटरनेट माडल के विश्व प्रसिद्ध दिग्गज प्रो. प्रियरंजन ने जोर देते हुए कहा कि चंबल संग्रहालय अब जल्द डिजिटल होगा और वे इसके लिए अपनी पूरी टीम के साथ डेरा डालेंगे।
संग्रहालय चंबल घाटी में साइकिल से 2800 किलोमीटर से अधिक यात्रा कर देश के सबसे बड़े गुप्त क्रांतिकारी दल ‘मातृवेदी’ पर गहन शोध करने वाले प्रसिद्ध दस्तावेजी फिल्म निर्माता शाह आलम ने बताया कि बीहड़ में कठिन शोध यात्रा के दौरान जेहन में चंबल संग्रहालय का आइडिया आया था लेकिन यह काम आसान नही था। लिहाजा पांच नदियों के संगम स्थल पर 25 मई 2017 को चंबल जनसंसद का आयोजन किया गया था।
जनसंसद में निकली जनसमस्याओं को राज्यों और केन्द्र सरकार के सामने रखा गया और चंबल संग्रहालय बनाने की मांग की गयी लेकिन जब एक साल बीत जाने के बाद भी सरकारों ने कुछ नही किया तब किशन पोरवाल ने चंबल संग्रहालय के लिए दुर्लभ दस्तावेज और जगह मुहैया कराई और 9 जून 2018 को तमाम सरोकारी शख्सियतों के सामने यह प्रस्ताव रखा लिहाजा अन्तर्राष्ट्रीय अभिलेख दिवस के मौके पर इसकी स्थापना की गई। आज हम सब चंबल संग्रहालय के विधिवत उद्घाटन समारोह का हिस्सा हैं। संग्रहालय समाज में बिखरे अमूल्य ज्ञान स्रोत सामग्री सहेजने के मिशन में शिद्दत से जुटा है, जहां से भी बौद्धिक संपदा मिलने की रोशनी दिखती है। संग्रहालय उन सुधीजनों से संपर्क कर रहा है। तमाम स्रोतो के ज्ञानकोष से चंबल संग्रहालय हर दिन समृद्ध होता जा रहा है।
उद्घाटन समारोह का संचालन करते हुए चंबल संग्रहालय से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार योगेश जादौन ने कहा कि जन-जन में विलुप्त हुए संसाधन-परंपराओं को सहेजना और अवाम में चेतना पैदा करने के साथ इस विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है और देश-विदेश के शोधार्थी की राह आसान करना हम चंबलवासियों की जवाबदेही और जिम्मेदारी है।

तीन दशक से महान शख्सियत को भूला देश
महान क्रांतिकारी पत्रकार कर्मवीर सुंदरलाल से जुड़े संस्मरण सुनाते हुए अनवर नकवी ने कहा कि इतनी बड़ी अजीम शख्सियत को आज तीन दशक बाद याद किया जा रहा है। उन्होने बताया कि बाबा सुविख्यात लेखक, आजादी आंदोलन के महान लड़ाका, सांप्रदायिक सद्भाव के प्रबल समर्थक के साथ इतिहासकार, बहुभाषा विद और दुनियां के तमाम धर्मों के व्याख्याकार थे। विश्व शांति मे गांधी-नेहरू-इंदिरा युग मे पंडित जी अनोखी विभूति थे। वह हमेशा पद, पैसा और प्रलोभन से दूर रहे। उन दिनों बड़ी मुश्किल से हमारा घर चलता था। उन्होने आगे कहा कि बाबा ने साप्ताहिक उर्दू स्वराज, कर्मयोगी, दैनिक भविष्य और नया हिन्द का संपादन कर पत्रकारिता के तेवर को जिन्दा रखा, जिसके लिए कई बार कठोर जेल यातना सही, भारत में अंग्रेजीराज पुस्तक से बिट्रिश सरकार की चूले हिला देने वाले सुंदरलाल जबरदस्त वक्ता भी थे लिहाजा वल्र्ड पीस काउंसिल के वाइस प्रेसिडेंट के हैसियत से चीन, वियना, कैरो, मास्को, स्टाकहोम, कोलंबो, बर्लिन, लंदन, टोक्यो, वियतनाम, क्यूबा, सोवियत रुस आदि देशों के राष्ट्र प्रमुखों द्वारा आमंत्रित किये गये। गौरतलब है कि हो-चि-मिन्ह, माओ त्से तुंग, फिदेल कास्त्रो, खु्रश्चेव कर्मवीर सुंदरलाल को अपना बड़ा भाई और आदर्श मानते थे।

चंबल संग्रहालय आश्चर्य की बात
राष्ट्रीय अभिलेखागार के अभिलेखीय अधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार ने गौरव महसूस करते हुए कहा कि 20 वर्षो की नौकरी में हमने यह पहली बार देखा है कि समाज अपनी विरासत को सहेज रहा है। दस्तावेजों के संरक्षरण से लेकर सरकारी या निजी तौर पर हर तरह के सहयोग के लिए वे सदैव तैयार हैं।

‘1857 पचनद घाटी के रणबांकुरे’ पुस्तक का विमोचन
‘नर्सरी आफ सोल्जर्स’ के नाम से चर्चित चंबल घाटी प्रथम स्वाधीनता संग्राम के महान लड़ाका पुरखो के इतिहास की खदान है जिसका उत्खनन कर जन इतिहासकार देवेन्द्र सिंह चैहान ने पचनद वैली के उन वीरों को श्रद्धांजलि दी है, जिन्हें मुख्यधारा के इतिहास में अब तक कोई स्थान नहीं मिला। शहीदों के बारे में बिखरी पड़ी तमाम लिखित और श्रुत सामग्री को सहेजकर, पुस्तक का रूप दिया गया है। यह पुस्तक सन 1842 के बुंदेला विद्रोह में शहीद हुए चंबल के प्रसिद्ध योद्धा लालजू कुशवाह से लेकर 1860-70 तक चंबल, सिंध-पहूज के कछारों में ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध विद्रोह की आग को प्रज्ज्वलित किये रहे गढ़ी बोहरा के चिमनाजी और दौलत सिंह कछवाह तक का विस्तार से वर्णन है। इतना ही नहीं पुस्तक के परिशिष्ट में 1857 के विद्रोह के समय चंबल के वीरों की प्रशस्ति में गाए जाने वाले लोकगीतों को तो स्थान दिया ही गया है, साथ ही उस वक्त चंबल के भिंड-इटावा क्षेत्र में पदस्थ अंग्रेज कलेक्टर और अन्य ब्रिटिश सेनानायकों की डायरियों, बस्तों और मुकदमों के फैसलों को भी उद्धरित किया गया है, जिनमें तत्कालीन विद्रोह की वास्तविक और प्रमाणिक छवि स्पष्ट रूप से अंकित है।
उदघाटन समारोह के दौरान चंबल संग्रहालय की बौद्धिक संपदा में इजाफा करने वालो को सम्मानित किया गया। उदघाटन समारोह के दौरान मंच पर प्राचीन सिक्के, दुर्लभ कैमरा, पुस्तकें, प्रत्रिकाएं दस्तावेज आदि गिफ्ट मिले. आखिर में प्रसिद्ध कवि श्याम स्नेही ने कविता पाठ किया। इस दौरान इं. रवि नितेश श्रीवास्तव, अविनाश गुप्ता, इं. योगेश यादव, दिनेश शाक्य, मो. फैजान, सैयद शाकिर अली, प्रेम शंकर यादव, नेम सिंह रमन, खिजर मो. कुरैशी, डा. बीपी शर्मा, दिनेश पालीवाल, डा. कुश चतुर्वेदी, डा. जितेन्द्र विसारिया, सूरज रेखा त्रिपाठी, जितेन्द्र राना, राजीव राज, नंद कुमार, जीशान अख्तर, रौली यादव, अजीम शानू, रविन्द्र सिंह चैहान आदि मौजूद रहे।

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